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Chanakya Niti in Hindi: सफलता पाने के 8 नियम “चाणक्य नीति”

Chanakya Niti in Hindi

पंडित चाणक्य (Chanakya Niti in hindi) को आज के जमाने में कौन नहीं जानता उनकी बुद्धिमानी का उल्लेख हमें उनकी कथाओं में एवं Chanakya Niti में मिलती है पंडित चाणक्य चंद्रगुप्त मौर्य के सलाहकार थे एवं पंडित चाणक्य ने ही चंद्रगुप्त मौर्य को भारतवर्ष में राज करने के लिए शिक्षा प्रदान की थी।

पंडित चाणक्य की बुद्धि के बल पर ही एक आम बालक भारतवर्ष का राजा बना, तो आइए जानते हैं Chanakya Niti क्या है? एवं इसे आप अपने जीवन में लाकर कैसे अपने जीवन में सफल पा सकते है।

सफलता पाने के 8 नियम “चाणक्य नीति” (Chanakya Niti in Hindi) 

1.  “कभी भी हमेशा व्यक्ति अपने कार्यों से महान बनता है अपने जन्म से नहीं।”

2. “प्रेम में पड़कर व्यक्ति हमेशा गलत निर्णय लेकर बाद में बर्बाद होने के पश्चात, पछताता है।”

3. “जिंदा रहने के लिए प्राणवायु के पश्चात दूसरी सबसे जरूरी चीज है पैसा।”

4. “तुम्हें तुम्हारे अच्छे काम का फल अवश्य मिलता है जिस प्रकार बछड़ा हजारों गाय में अपनी मां को ढूंढ लेता है।”

5. “जो व्यक्ति शारीरिक शक्ति से दुर्बल लेकिन मन की शक्ति से शक्तिशाली हो उसे दुनिया का कोई ताकत नहीं हरा सकता।”

6. “जिस प्रकार दूध में मिलकर जल भी दूध बन जाता है उसी प्रकार मूर्ख व्यक्ति भी बुद्धिमान व्यक्ति के संगत में रहकर बुद्धिमान बन सकता है।”

7. “सबसे बड़ा गुरु मंत्र यह है कि आप अपना राज किसी को ना बताएं अन्यथा यह आपके बर्बादी का कारण हो सकता है।”

8. “बुद्धि से पैसा कमाया जा सकता है, नामं की पैसे से बुद्धि कमाया जा सकता है।”

पंडित चाणक्य कौन थे ? – Who was Pandit Chanakya?

चलिए जानते हैं पंडित चाणक्य कौन थे:- चाणक्य का जन्म एक गरीब परिवार में हुआ था बचपन से ही वह आम ऋषि मुनियों की तरह दिखने में उतने आकर्षक भी नहीं थे।

लेकिन चाणक्य अपने बाल्यकाल से ही बहुत ही चतुर एवं बुद्धिमान थे इसलिए उन्हें उस वक्त के सबसे तेजस्वी गुरु का आसरा मिला एवं उनका नाम तक्षशिला था आगे चलकर तक्षशिला ने उन्हें शिक्षा प्रदान की आचार्य चाणक्य ने 16 वर्ष से 25 वर्ष तक अर्थशास्त्र एवं राजनीति का ज्ञान अच्छी तरह से ले लिया था।

आचार्य चाणक्य ने नालंदा में शिक्षा प्रदान की आचार्य चाणक्य राजतंत्र के प्रबल समर्थक थे, एक बार मगध के दरबार में आचार्य चाणक्य को बुलाया गया एवं किसी बात को लेकर आचार्य चाणक्य की घोर निंदा की गई थी।

आचार्य चाणक्य ने उसी वक्त मगध को सर्वनाश करने का सोच लिया था एवं आचार्य चाणक्य ने अपनी बुद्धिमानी से एक आम बालक चंदू को चंद्रगुप्त मौर्य बनाया आगे चलकर चंद्रगुप्त मौर्य ने मगध पर विजय प्राप्त कर लिया।एवं नंद वंश को मिटाकर मौर्य वंश की स्थापना की आचार्य चाणक्य एक चतुर एवं बुद्धिमान नीति कार थे उन्होंने अर्थशास्त्र जयते विषय में अपने नियम स्थापित किए जिसका महत्व आज भी स्वीकार किया जाता है।

Chanakya Niti Quotes in Hindi:-

चन्द्रगुप्त : किस्मत पहले ही लिखी जा चुकी है, तो कोशिश करने से क्या मिलेगा !

चाणक्य : क्या पता किस्मत में लिखा हो की कोशिश से ही मिलेगा !! – Chanakya Niti

 

“जीवन में आगे बढ़ना है तो बहरे हो जाओ क्योंकि अधिकतर लोगों कि बातें मनोबल गिराने वाली होती है।” – Chanakya Niti

Chanakya Niti in Hindi

“इंसान कहता है की टूटी चीज़ मंदिर में नहीं रखनी चाहिए फिर इंसान खुद टूटकर क्यों मंदिर जाता है।” – Chanakya Niti

Chanakya Niti in Hindi

“अपनी गलती को स्वीकारना झाड़ू लगाने के सामान है, जो थोड़ा अजीब लगता है, लेकिन स्वयं को चमकदार और साफ़ कर देती है।” – Chanakya Niti

 

“कभी किसी के सामने अपनी सफाई पेश मत करना क्योकि जिसे तुम पर विश्वास है उसे जरुरत नहीं और जिसे तुम पर विश्वास नहीं वो मानेगा ही नहीं।” – Chanakya Niti

 

“मुश्किल इस दुनिया में कुछ भी नहीं फिर भी लोग अपने इरादे बदल देते है, अगर सच्चे दिल से हो चाहत कुछ पाने की तो रास्तो के पत्थर भी अपनी जगह छोड़ देते है।” – Chanakya Niti

 

“रिश्ता, दोस्ती और प्रेम – उसी के साथ रखना, जो तुम्हारी हंसी के पीछे का दर्द, गुस्से के पीछे का प्यार और मौन के पीछे की वजह समझ सके।” – Chanakya Niti

 

“साथ रहकर जो छल करे उससे बड़ा कोई शत्रु नहीं हो सकता और जो हमारे मुँह पर हमारी बुराइयाँ बता दे उससे बड़ा कोई मित्र नहीं हो सकता।”  – Chanakya Niti

 

“बार बार आंसू साफ़ करने की वजह अपनी जिंदगी से उसको ही साफ़ कर दो जिसकी वजह से आपकी आँखों में आंसू आते है।” – Chanakya Niti

Chanakya Niti in Hindi

“भगवान मूर्तियों में नहीं है. आपकी अनुभूति आपका इश्वर है. आत्मा आपका मंदिर है।” – Chanakya Niti

 

“शिक्षा सबसे अच्छी मित्र है. एक शिक्षित व्यक्ति हर जगह सम्मान पाता है. शिक्षा सौंदर्य और यौवन को परास्त कर देती है।” – Chanakya Niti

 

“कोई व्यक्ति अपने कार्यों से महान होता है, अपने जन्म से नहीं।” – Chanakya Niti

 

“फूलों की सुगंध केवल वायु की दिशा में फैलती है. लेकिन एक व्यक्ति की अच्छाई हर दिशा में फैलती है।” – Chanakya Niti

 

“संतुलित दिमाग जैसी कोई सादगी नहीं है, संतोष जैसा कोई सुख नहीं है, लोभ जैसी कोई बीमारी नहीं है, और दया जैसा कोई पुण्य नहीं है।” – Chanakya Niti

 

“यदि किसी का स्वभाव अच्छा है तो उसे किसी और गुण की क्या जरूरत है ? यदि आदमी के पास प्रसिद्धि है तो भला उसे और किसी श्रृंगार की क्या आवश्यकता है।” – Chanakya Niti

 

चाणक्य नीति शास्त्र से हमें क्या सीखने को मिलता है:- What do we get to learn from Chanakya Niti Shastra

चलिए जानते हैं Chanakya Niti शास्त्र से हमें क्या सीखने को मिलता है –

★ फूल की खुशबू जैसे चारों और फैल जाती है वैसे एक महान पुरुष भी विश्व में चारों और प्रख्यात हो जाते हैं चाणक्य के कारण एक आम बालक राजा बना एवं वहां के राज्य प्रजा का अच्छे से लालन-पालन किया अतः चाणक्य ने केवल अपने बुद्धि से ही विश्व में प्रख्याति पाई।

★ शक्ल से ज्यादा अकल की जरूरत होती है चाणक्य सुंदर नहीं थे पर बहुत ज्यादा अकल मंद थे।

★ अगर आप एक बड़े पद पर हो तो किसी भी इंसान को छोटा एवं तुच्छ बिल्कुल ना समझे क्योंकि एक आम एवं छोटा व्यक्ति भी एक बड़े राजा को बर्बाद कर सकता है।

★ अगर आपको युद्ध एवं जीवन के किसी भी मोड़ पर विजय हासिल करना है तो आपको अपने शत्रु पर एकदम से वार ना करके धीरे-धीरे वार करने पर आपकी विजय निश्चित होगी।

★ हमेशा याद रखें एक व्यक्ति का कर्तव्य यह है कि जिसने आपकी मदद की है उसकी मदद आप बुरे वक्त में जरूर करें यह आपका सबसे बड़ा कर्तव्य है।

★ प्रेम एक बाधा है जो जिंदगी में कुछ बड़ा करना चाहता है उस व्यक्ति के लिए

आचार्य चाणक्य की मृत्यु किस प्रकार हुई:- How Acharya Chanakya died

चलिए जानते हैं कि आचार्य चाणक्य की मृत्यु कब हुई यह बात बहुत कम लोग जानते हैं की चंद्रगुप्त के पुत्र बिन्दुसार ही चंद्रगुप्त की मृत्यु का कारण बने थे बिन्दुसार जब राजा के पद पर नियुक्त किए गए तब उनके द्वारा कुछ दरबारी एवं उनके परिजन आचार्य चाणक के प्रति उन्हें भड़काने लगे थे और उन्हें यह कहते थे कि तुम्हारी माता का मृत्यु का कारण ही आचार्य चाणक्य बने हैं।

यह सुन सुनकर बिन्दुसार ने आचार्य चाणक्य को अपने दरबार पर बेइज्जत किया एवं आचार्य चाणक्य ने वह दरबार छोड़ने का फैसला किया था और उन्होंने दरबार छोड़कर आजीवन उपवास करने का फैसला लिया इसी कारण से आचार्य चाणक्य की मृत्यु हुई।

Final Words:-

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