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Indian Farmer Essay in Hindi: भारतीय किसान पर निबंध हिंदी में..!

Farmer Essay in Hindi

“माना गरीब हूँ मैं, बेटा किसान का, मैं ही बनूंगा गौरव, भारत महान का।।”

भारतीय किसान निबंध इन हिंदी को समर्पित अपने इस आर्टिकल में, यदि हम, अपने भारतवर्ष को किसानवर्ष’’ कहें तो कोई अतिश्योक्ति नहीं होगी क्योंकि भले ही हम, आधुनिकता की राह पर कितने ही आगे क्यूं ना निकल आये हो लेकिन आज भी हम, अपने व अपनो के जीवन के लिए ग्रामीण भारत के मस्तक कहे जाने वाले अन्नदाताओं पर ही निर्भर हैं जिसकी पूरी तस्वीर हम, Essay on Bhartiya Kisan – भारतीय किसान पर निबंध, प्रस्तुत करने का प्रयास करेंगे।

प्रस्तावना:

Bharatiya Kisan Par Nibandh पर केंद्रित अपने इस आर्टिकल में, पूरा प्रयास करेंगे कि, अपने पाठको व विद्यार्थियों को किसानों की जीवनशैली से परिचित करवाया जाये जो कि, वास्तव में, बेहद कठिन कार्य है क्योंकि एक किसान के जीवन को शब्दो में, पिरोना सरल नहीं है क्योंकि किसी भी किसान का जीवन सरल व साधारण नहीं होता है बल्कि अनेको प्रकार के उतार-चढ़ावों से भरा-पड़ा होता है।

भारतवर्ष के किसान, भारतवर्ष के अन्नदाता कहलाते है जो कि, एक ऐसा गौरव, स्वाभिमान और अभिमान है जिसे हमारा किसान लाख दुख, कष्ट और पीड़ा झेलकर भी गंवाना नहीं चाहता है बल्कि अपने पूरे जीवन के दांव पर लगाकर खेती करते है ताकि भारत का पेट भरता रहे और भारत का कोई भी नागरिक भूखा पेट ना सोयें और यही है हमारी भारतीय किसान की असली और मौलिक पहचान।

अन्त, भारतवर्ष के किसानों पर केंद्रित अपने इस आर्टिकल में, हम विस्तार से अपने सभी पाठको व युवाओं को विस्तार से Kisan Essay in Hindi for Class 2 to 8 के साथ ही साथ Essay on Farmer की भी एक संतुलित व सन्तोषजनक तस्वीर प्रस्तुत करने का प्रयास करेंगे।

कौन होता है किसान?

चीर के जमीन को, मैं उम्मीद बोता हूँ, मैं किसान हूँ, चैन से कहां सोता हूँ।।

त्याग, समर्पण, बलिदान व कठोर परिश्रम आदि को किसान का पर्यायवाची कहा जाता है जिसके पैरो में, छाले होते है, पूरे दिन पसीने की बारिश में नहाता है, खेत की सौंधी मिट्टी को शिरोधार्य करता है और खेती को मातृभूमि मानकर तन, मन और धन से उसकी सेवा करके अनाज उगाने वाले कर्मयोगी / तपस्वी को ही किसान कहा जाता है। 

कौन होता है किसान? को एक ही शब्द, वाक्य या गंघाश में, स्पष्ट करना सरल नहीं है क्योंकि एक पूरा का पूरा जीवन होता है किसान, एक दर्शन होता है किसान और एक अस्तित्व होता है किसान जिसे हम, अपने Kisan Nibandh in Hindi पर निबंध हिन्दी मे में, प्रस्तुत करना पूरा प्रयास करेंगे।

किसान और उनका समर्पित जीवन?

उन घरो में, जहां मिट्टी के घड़े रहते है, कद में छोटे हो, मगर लोग बड़े होते है।।

आइए अब हम, आप सभी को कुछ बिंदुओँ की मदद से किसान व उनके समर्पित जीवन की एक संतुलित तस्वीर प्रस्तुत करने की कोशिश करें जो कि, इस प्रकार से हैं:-

1. सादा जीवनशैली का पुजारी है किसान

यहां पर हमें, बताते हुए बेहद हर्ष हो रहा है कि, जहां एक तरफ हमारे लोग आधुनिकीकरण की चका-चौंध से भ्रमित हो देखा-देखी कर रहे है वहीं हमारे किसान आज भी सादा भारतीय जीवन शैली का दामन थामे हुए एक सादा जीवन जी रहे है जिसे हम, कुछ बिंदुओं की मदद से दर्शायेंगे जो कि, इस प्रकार से हैं:-

  • अरुणोदय से पहले किसानोदय अर्थात् सूरज निकलने से पहले ही किसान का उठ जाना।
  • आज कल के मंहेग व गमकते हुए दन्त मंजन या ब्रश के नशे से दूर प्रकृति की महक से सुंगधित नीम, आम या फिर बांस के दातुन से दन्त-मंजन करना।
  • घर में, सभी को जगाना।
  • नियमित रुप नदी, पोखर या फिर कुंए के शीतल जल से स्नान कर शरीर व मन को तृप्त करना।
  • देवता की पूजा-अर्चना करना।
  • साधारण से भी साधारण से लिए स्वादिष्ट और पौष्टिकता के तमाम मानदँडो को पूरा करने वाले हल्के सादे भोजन का सेवन करना जैसे कि – मक्के की रोटी, बथुऐ का साग, पोरो का साग, दलभाजी और सतुआ आदि का सेवन ।
  • इसके बाद राह में, परिजनों से मीठे नौक-झौंक करते हुए अपनी कर्मभूमि अर्थात् खेत जाना।
  • वहां पर खेती से संबंधित तमाम कार्यों को सहर्ष करना।
  • दोपहरी में, किसी पेड़ की छांव में, जाकर सुस्ताना और गृहिणी द्धारा दो रोटी, एक प्याज और तीखे मिर्च का सात्विक भोजन करना।
  • दोपहरी में, गृहिणी के साथ थोड़ा ही सही लेकिन अच्छा समय बिताकर अपने वैवाहिक संबंधो को प्रगाढ़ करना।
  • सांझ होते – होते मन में, प्रफुल्लित हो खेती का काम करते हुए लोकगीतो को मीठे स्वरो में गुनगुनाना ।
  • अन्त में, कांधे पर कुदाल डाले, चेहर पर पानी और आंखो में, चमक लिए घर वापस आना और अपने संसार में, रम जाना।

उपरोक्त बिंदुओं की मदद से हमने आप सभी को विस्तार से किसान के सादा जीवनशैली के एक सुन्दरतम छवि प्रस्तुत की।

2. स्वाभिमान का स्वामी है हमारा किसान

भले ही आज के समय में, लोग पढ़ाई-लिखाई करके कितने ही उच्च पदों पर क्यों ना पहुंच जाये लेकिन वे हमारे किसानों की बराबरी नही कर सकते है क्योंकि एक तरफ जहां हमारा किसान खुद को दांव पर लगाकर अर्थात् अपना सर्वस्व न्यौछावर करके राष्ट्र का निर्माण करता है वहीं दूसरी तरफ उसे इस बात का स्वाभिमान रहता है कि, वो एक किसान है और इशका किसान होना ही उसके जीवन को सार्थकता प्रदान करता है।

3. त्याग व समर्पण का प्रतीक है हमारा किसान

हमारा किसान ना केवल हमारा अन्नदाता है बल्कि त्याग व समर्पण का सबसे बड़ा प्रतीक है क्योंकि हमारा किसान अपने राष्ट्र के लिए कुछ भी कर गुजरने को तैयार रहता है। एक तरफ जहां भारतीय सैनिक, सीमा पर देश की रक्षा करते है वहीं किसान देश के भीतर अपने मौलिक कर्तव्य व दायित्वों का निर्वाह करके देश की सतत सेवा करते है और इसी लिए कहा गया है कि, त्याग और समर्पण का प्रतीक है हमारा किसान।

निराशा में भी आशा का दीप है हमारा किसान

किसान चाहें कितनी ही बुरी स्थिति में क्यों ना हो लेकिन फिर हर दिवस का खुले दिल से उत्सव मनाता है हमारा किसान और इसीलिए हमारे किसान को निराशा में भी आशा का दीपक कहा जाता है।

हमारी सभ्यता व संस्कृति का सृजक है किसान

किसान ना केवल हमारा अन्नदाता है बल्कि हमारी सभ्यता व संस्कृति का सृजक भी है क्योंकि हमारे किसानों द्धारा ही भारतीय सभ्यताओं, संस्कृतियों व परम्पराओं को हर हाल में, निभाया जाता है और उनकी पवित्रता को बरकार रखते हुए भारतीय संस्कृति व सभ्यता का पोषण किया जाता है।

जीवन जीने का सबसे बड़ा आदर्श है हमारा किसान

जीवन में, हजारों प्रकार की समस्याओं और असफलतायें मिलती है और हम, हार मानकर हाथ-पर-हाथ धरकर बैठ जाते है लेकिन हमारे किसानों पर बिजली टूट पड़ती है फिर भी आंखो में, आंसू लिए खेतो में, अपना पसीना बहा रहे होते है और तमाम परेशानियों को अपने भीतर समेटकर सांक्ष के समय चेहरे पर खुशी का पानी लिये घर आते है और पूरे परिवार को खुश रखने का अथक प्रयास करते है। इसी वजह से हमने कहा कि, हमारे किसान जीवन जीने का सबसे बड़े आदर्श माने जाते है आदि।

उपरोक्त बिंदुओँ की मदद से हमने आप सभी को विस्तार से किसान व उनके समर्पित जीवन से आपको परिचित करवाया।

भारत में किसान का महत्व क्या है?

किस लोभ से किसान, आज भी लेते नहीं विश्राम है, घनघोर वर्षा में भी, करते निरन्तर काम है।।

इसमें कोई दो-राय नहीं है कि, हमारा भारतवर्ष, वास्तव में, अन्नदाताओं का देश है और इसी वजह से हम, अपने भारतवर्ष को किसानवर्ष कहना कहीं अधिक उचित, सार्थक व प्रासांगिक समझते है क्योंकि इससे हमारे भीतर की भारतीयता की स्पष्ट अभिव्यक्ति हो पाती है और भारतीय किसान की इसी झलक को हम, Essay Hindi Me Kisan में, प्रस्तुत करना चाहते है।

भारतीय किसान (कृषक) पर निबंध के तहत हम, अपने सभी पाठको व विद्यार्थियों को बता दे कि, हमारा भारतवर्ष शुरु से ही “कृषि प्रधान देश’’ रहा है जहां पर मुख्य व्यवसाय व आजीविका के साधन के रुप में, कृषि को मान्यता दी जाती है और आंकड़े भी बताते है कि, भारत में, बहुत बड़े पैमाने पर कृषि की जाती है जिससे ना केवल पूरे राष्ट्र के अनाज की मांग पूरी की जाती है बल्कि विदेशो में, निर्यात करके भारतीय अर्थव्यवस्था को भी मजबूती प्रदान की जाती है।

किसान पर निबंध हिन्दी मे, हम, कुछ मौलिक बिंदुओं की मदद से भारत में, कृषि व कृषक के महत्व को उजागर करने का प्रयास करेंगे जो कि, इस प्रकार से हैं:-

  • कृषि, भारत का सबसे प्राचीन व सबसे बड़ा व्यवसाय है

भारतीय कृषि का महत्व इसी तथ्य से स्पष्ट हो जाता है कि, भारत में, कृषि पद्धति की एक लम्बी गौरवपूर्ण परम्परा रही है जिसे प्रमाण की जरुरत नहीं है और साथ ही साथ कृषि को भारतवर्ष में, सबसे बड़े व्यवसाय के तौर पर आधिकारीक मान्यता प्राप्त है क्योंकि आज के आधुनिक भारत में, 80 प्रतिशत की आबादी कृषि से जुड़ी है।

  • भारतीय सभ्यता व संस्कृति का मूलाधार है किसान

हमें, कहते हुए अत्यन्त गौरव महसूस होता है कि, भारतीय सभ्यता व संस्कृति का मूलाधार कोई और नहीं बल्कि हमारे कठोर परिश्रमी किसान है क्योंकि किसानों से ही हमारी भारतीय सभ्यता की जड़े उत्पन्न होती है और एक वृक्ष का रुप लेकर पूरी भारतीय संस्कृति का प्रचार-प्रसार करके पूरे भारतवर्ष को गौरवान्वित करती है।  

  • किसान ही हमारा अन्नदाता है

भले ही आज हम, 21वीं सदी में, सांसे ले रहे है, शिक्षा प्राप्त कर रहे है, हजारो मील की दूरी पर बैठे अपने परिजनो से बिना रुकावट संवाद कर रहे हो या फिर मीलो की दूरी मिनटो में, तय कर रहे हो लेकिन फिर भी किसानो की अपनी एक अनन्त प्रासांगिकता है जिसका सबसे बड़ा प्रमाण यही है कि, आज के समय में भी किसान ही हमारे अन्नदाता है।

  • भारतीय अर्थव्यवस्था का मौलिक स्तम्भ है किसान

किसान कोई आम इंसान नहीं होता है बल्कि उसमें एक शिक्षक, चिकित्सक, अर्थशास्त्री और पथ-प्रदर्शक रुपी व्यक्तित्व से परिपूर्ण के महा-मानव होता है जो कि, धरती का सीना चीकर फसल उगाता है जिससे ना केवल वो अपने देश का पेट भरता है बल्कि विदेशों में, बड़े पैमाने पर अनाज का निर्यात करके भारतीय अर्थव्यवस्था को भी मौलिक मजबूती और स्थायित्व प्रदान करता है।

इसलिए नि-संदेह हम कह सकते है कि, हमारा किसान ही वास्तव में, हमारी भारतीय अर्थव्यवस्था का सबसे बड़ा मौलिक स्तम्भ होता है और किसान-अन्नदाता से राष्ट्रनिर्माता तक किसान केवल उत्पादन ही नहीं करता है या फिर खुद को कृषि तक ही सीमित नहीं रखता है बल्कि हमारा किसान वास्तव में, एक अन्नदाता से लेकर एक राष्ट्रनिर्माता तक की संघर्षयुक्त भूमिका को अदा करता है क्योंकि किसान ही उस मंच का निर्माण करता है जहां से हमारे शिक्षक, राजनेता, इंजीनियर, समाज-सेवी और अन्य प्रकार के तत्व राष्ट्र निर्माण के अपने छोटे-छोटे कार्यो का सम्पादन करते है लेकिन इन्हें इसके लिए उचित मंच प्रदान करने वाला किसान ही होती है और इसीलिए हमने किसान को अन्नदाता से राष्ट्रनिर्माता की संज्ञा दी है।

उपरोक्त बिंदुओं की मदद से हमने अपने सभी पाठको व विद्यार्थियो को विस्तार से बताया कि, किसानों का क्या महत्व होता है।

किसान और उसकी समस्यायें?

“खेता का पानी, अब आंखो में आ गया है। मेरे गांव का किसान, अब शहर में आ गया है।।”

आइए अब हम, अपने सभी विद्यार्थियों को कुछ बिंदुओं की मदद से किसान और उसकी समस्याओं के बारे में, विस्तापूर्वक कुछ बिंदुओं की मदद से बतायें जो कि, इस प्रकार से हैं:-

1. किसान का अशिक्षित होना:

हमें, ये कहते हुए अत्यन्त गौरव होता है कि, हमारा किसान ही हमारा अन्नदाता और राष्ट्रनिर्माता है लेकिन साथ ही साथ लेकिन हमारे किसान का अशिक्षित होना उतना ही दुर्भाग्यपूर्ण है जिसकी वजह से हमारा किसान जो कि, स्वयं ही विकास और प्रगति का दूसरा नाम है विकास पर प्रगति की राह में, पिछड़ जाते है और ना अपना विकास कर पाते है और ना ही अपने परिवार का।

2. सेठ-साहूकारों द्धारा लूटा जाना:

जैसा कि, हमने आपको बताया कि, हमारा किसान अशिक्षित होता है जिसकी वजह से उन्हें समाज के ठेकेदार कहे जाने वाले सेठ-साहूकारों द्धारा सरलता से ठग लिया जाता है और कर्ज के ऐसे दलदल में, फंसा दिया जाता है जिससे निकलते-निकलते हमारा किसान दम तोड़ देता है लेकिन बाहर नहीं निकल पाता है जिसकी कीमत उसके पूरे परिवार को सेठ-साहूकार के यहां पर बेगारी करके चुकानी पड़ती है।

3. आपदाओं का प्रकोप:

हमारा किसान, असल मायनो में, समस्याओँ व परेशानियों का घर होता है क्योंकि किसान एक समस्या का समाधान नहीं कर पाता है कि, दूसरी समस्या उसकी चौखट पर दस्तक दे देती है क्योंकि किसान द्धारा बड़ी मात्रा में पूंजी लगाने के बाद फसल तैयार होती है लेकिन आमतौर पर दुर्भाग्यवश हमारे किसान की ये फसल घर तक सुरक्षित नहीं पहुंच पाती है बल्कि भारी वर्षा, सूखा, चक्रवात, ओलावृष्टि व बाढ़ आदि के कारण उनके दुर्भाग्य की भेंट चढ़ जाती है और हमारा किसान जीते-जी मर जाता है।

4. सामाजिक तिरस्कार का स्वामी:

वर्तमान समय में, तथ्य व सत्य की कड़वी सच्चाई की तीखी कसौटी पर जब हम, अपने किसानो को परखते हैं तब इसके बाद हमारा किसान सामाजिक तौर तिरस्कृत स्वामी के तौर पर उभरता है क्योंकि भले ही कितना ही क्यूं ना कह लें कि, किसान भारतवर्ष का अन्नदाता है या फिर भारतवर्ष का दूसरा नाम ही किसानवर्ष है लेकिन सर्वत्र हमारा किसान पूरे भारतवर्ष में, तिरस्कृत पाया जाता है।

आधुनिक भारत, जिसके निर्माण में, किसानों ने, अपना पूरा जीवन व अपनी पीढियों का जीवन अर्पित कर दिया है आज उसी आधुनिक भारत के विद्यार्थी, समाज-सेवी और राजनेता किसानों को सिर्फ किसान कहकर तिरस्कृत करते है अर्थात् किसानों को हीन-दृष्टि से देखा जाता है।

5. अन्नदाता से राष्ट्रनिर्माता हमारा किसान हाशिये पर जी रहा है:

यह एक कड़वी सच्चाई है कि, अन्नदाता से लेकर राष्ट्रनिर्माता की भूमिका अदा करने वाला हमारा बहु-आयामी किसान आज समाज के हाशिये पर अपने अस्तित्व के लिए संघर्ष कर रहा है जो कि, ना केवल हमारे लिए बल्कि पूरे भारतवर्ष के लिए चिन्ता का मौलिक विषय है।

उपरोक्त सभी बिंदुओँ की मदद से हमने आप सभी को किसान और उनकी समस्याओँ के बारे में, बताया।

उपसंहार:

“मेरी नींद को तकलीफ ना मंदिर की घंटी से, ना मस्जिद की आजान से, मेरी नींद को तकलीफ बोर्डर पर कटते हुए सिपाहियों के सिरो और खेतो में मरते किसानो से है।।”

भारतवर्ष के अन्नदाता कहे जाने वाले हमारे किसानों को समर्पित अपने इस Essay on Indian Farmer for Students and Children मे, हमने आपको अपने किसानों के जीवन से जुड़े सभी पहलूओँ की विस्तापूर्वक जानकारी प्रदान की ताकि आधुनिकीकरण की चका-चौंध में, खोए हमारी युवा पीढ़ी किसानो के जीवन को करीब से देख सकें और महसूस कर सकें और कृषि को अपने करियर के तौर पर स्वीकार कर सकें और यही हमारे इस आर्टिकल का लक्ष्य है।

अन्त, हमें उम्मीद है कि, आप सभी को हमारा भारतीय किसान निबंध रुपरेखा, Essay on Kisan, Farmer Essay in Hindi को समर्पित आर्टिकल आपको पसंद आया होगा व आर्टिकल में दी गई जानकारी आपके लिए मददगार साबित हुई होगी जिसके लिए आप हमारे इस आर्टिकल को लाइक करेंगे, शेयर करेंगे और कमेंट करके अपने विचार व सुझाव हमें, बतायेंगे ताकि हम, इसी तरह के आर्टिकल आपके लिए लाते रहें।

 

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