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Sardar Vallabhbhai Patel Biography in Hindi : सरदार वल्लभ भाई पटेल का जीवन परिचय

Sardar Vallabhbhai Patel Biography in Hindi

562 देशी रियासतों का भारत में विलय करने वाले, ICS को  IAS मे बदलने वाले, मरणोपरान्त 1991 में, भारत रत्न से सम्मानित, भारतीय राजनीति के लौह पुरुष / Iron Man of India की उपाधि से सुशोभित श्री. सरदार वल्लभभाई पटेल की जीवन पर हम, अपने आज के इस को समर्पित करते हैं जो कि, ना केवल भारत के पहले उप – प्रधानमंत्री व गृह मंत्री रहें बल्कि अंग्रेजी शासन का विरोध करने वाले प्रखर व तीव्र आलोचक भी थे।

जीवन की डोर तो ईश्वर के हाथ में है इसलिए चिन्ता की कोई बात हो ही नहीं सकती हैं। – Sardar Vallabhbhai Patel

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Sardar Vallabhbhai Patel Biography Hindi : सरदार वल्लभ भाई पटेल की जीवनी को समर्पित अपने इस लेख में, हमारी ये कोशिश रहेगी कि, हम, सरदार वल्लभभाई पटेल की पूरी जीवनी को समर्पित व निष्पक्ष भाव से आपके समझ प्रस्तुत कर सकें ताकि हमारे सभी पाठक व राजनीतिक के विद्यार्थी भारतीय स्वतंत्रता के महानायक के बारे में, विस्तार से जानकारी प्राप्त कर सकें।

साथ ही साथ हमारे नियमित पाठकों का ये प्रश्न रहता है कि, सरदार वल्लभ भाई पटेल कौन थे और  सरदार वल्लभ भाई पटेल का जीवन परिचय क्या है?

उनके इस प्रश्न को उनकी संतुष्टि के स्तर तक पूरा करने के लिए हम, इस लेख में, सरदार वल्लभ भाई पटेल की पूरी जीवनी को प्रस्तुत करने का प्रयास करेंगे और कोशिश करेंगे कि, उनके जीवन के हर पहलू को उजागर कर सकें ताकि ना केवल आप उन्हें नज़दीक से देख पायें बल्कि उनसे प्रेरणा व प्रोत्साहन भी प्राप्त कर पायें।

Short में सरदार वल्लभ भाई पटेल कौन थे?

हम, आजकल सभी चीज़ों की जानकारी Short में, प्राप्त करना पंसद करते है जिससे हमारे समय की बचत और ज्ञान की वृद्धि होती है इसलिए अपने Short में, जानकारी प्राप्त करने वाले अपने सभी पाठकों को हम, बताना चाहते है कि, सरदार वल्लभ भाई पटेल कौन थे?

सरदार वल्लभ भाई पटेल को हम, भारतीय राजनीति के लौह पुरुष / Iron Man of India के नाम से, 562 देशी रियासतों का भारत में विलय करने वाले नेता के तौर पर और साथ ही साथ स्वतंत्र भारत के पहले व एकमात्र गृह-मंत्री व उप-प्रधानमंत्री के नाम से जानते है।

 कठिन समय में, कायर बहाना ढूंढते है, बहादुर व्यक्ति रास्ता खोजते हैं।– सरदार पटेल

सरदार वल्लभ भाई पटेल, भारतीय राजनीतिज्ञ, राजनेता और प्रबल प्रवक्ता थे जिन्हें भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस के एक दिग्गज नेता और साथ ही साथ भारतीय गणराज्य की स्थापना करने वाले पिता के रुप मे, सम्मानित किया जाता है।

भारत के एकीकृत विकास के लिए सरदार वल्लभ भाई पटेल ने, एकीकृत मार्गदर्शन व निर्देशन की योजना बनाई, स्वतंत्रता प्राप्ति के लिए देश के संघर्ष में खुद को समर्पण भाव से झौंक देने वाले इस कर्तव्यपरायण व दायित्वनिष्ठ नेता को हम, भारत और भारतीयता के आधार के रुप में भी जानते हैं जिनका योगदान भारत व भारतीय राजनीति में, शाश्वत है।

Sardar Vallabhbhai Patel Biography Hindi? : सरदार वल्लभ भाई पटेल का जीवन परिचय?

सरदार वल्लभ भाई पटेल, एक बहुआयामी व्यक्तित्व वाले व्यक्ति थे जिनके व्यक्तित्व की झलक हमें, उनके सर्वत्र देखने को मिलती है इसलिए उनके जीवन परिचय को आपके समक्ष प्रस्तुत करने के लिए हम, कुछ मौलिक बिंदुओं की मदद लेंगे ताकि सरदार वल्लभ भाई पटेल की एक जीवन्त तस्वीर खींची जा सकें।

वल्लभ भाई पटेल की जीवन – यात्रा को प्रदर्शित करते ये बिंदु इस प्रकार से हैं –

1. Iron Man of India कहे जाने वाले पटेल का पूरा नाम क्या था?

यहां ये बात उल्लेखनीय और दर्ज करने वाली है कि, हम और आप सभी लोग आमतौर पर भारतीय राजनीति के इस महानायक और विशेष तौर पर Iron Man of India कहे जाने वाले इस अभूतपूर्व नेता तो सरदार वल्लभ भाई पटेल के नाम से जानते हैं जबकि इनका मूल व वास्तविक नाम कुछ और हैं।

हम, अपने सभी पाठकों व राजनीति के विद्यार्थियों को बताना चाहते हैं कि, भारतीय राजनीति के लौह पुरुष कहे जाने वाले पटेल का पूरा नाम वल्लभभाई झावेरभाई पटेल था जिन्हें भारत व अन्य स्थानों पर आमतौर पर हिंद, ऊर्दूं व फारसी में, सरदार कह कर विभूषित किया जाता था जिसके मूल अर्थ होता है, प्रमुख

 बोलने में मर्यादा मत छोड़ना, गालियाँ देना तो कायरों का काम हैं। – सरदार पटेल

2. सरदार पटेल का जन्म कब, कहां और किनके यहां हुआ था?

भारतीय राजनीति के लौह स्तम्भ कहे जाने वाले सरदार वल्लभ भाई पटेल का जन्म 31 अक्टूबर, 1875 को नाडियाद, गुजरात में एक लेवा पटेल अर्थात् पाटीदार जाति वाले झावेरभाई पटेल व लाडबा देवी नामक दम्पति के घर में, चौथी संतान के रुप में, हुआ था।

3. पटेल के कुल कितने भाई थे?

हमारे कई पाठकों व विद्यार्थियों को जानकर हैरानी होगी कि, पटेल का जन्म झावेरभाई पटेल व लाडबा देवी नामक दम्पति के घर में, तीन भाईयों के बाद हुआ था इस प्रकार सरदाल वल्लभ भाई पटेल अपने परिवार के सबसे छोटे व लाड़लें सदस्य थें।

सरदाल वल्लभ भाई पटेल के सभी तीनों बडे भाईयों के नाम इस प्रकार से हैं – सोमाभाई, नरसीभाई और विठ्ठलभाई

4. पटेल का परिश्रमी बाल्यकाल व शैक्षणिक काल कैसा रहा?

सरदार वल्लभ भाई पटेल जिन्हें उनकी लोकप्रियता के कारणवश भारत का बिस्मार्क भी कहा जाता है का बाल्यकाल और शैक्षणिक काल अति दयनीय स्थितियों में गुजरा क्योंकि उनका जन्म मूलत एक किसान परिवार में, हुआ था और जिसकी वजह से आर्थिक तंगहाली उन्हें विरासत के रुप में, मिली थी।

लेकिन पटेल ने, इस आर्थिक तंगहाली के विरासत को भी दिल खोलकर स्वीकार किया था क्योंकि पटेल बचपन से ही बेहद परिश्रमी और जुझारु व्यक्तित्व वाले बालक थे।

जहां तक बात है पटेल की शिक्षा कि, तो हम, अपने सभी पाठकों को बताना चाहते है कि, सरदाल वल्लभ भाई पटेल ने अपनी शुरुआती / आरंभिक शिक्षा गुजराती स्कूल से ही शुरु की जिसके कुछ समय बाद उन्होंने अंग्रेजी मीडियम स्कूल में भी दाखिला लिया।

ऐसा कहा जाता कि, पटेल को अपनी स्कूली शिक्षा पूरी करने में, काम समय लगा क्योंकि साल 1897 मे, जाकर जब पटेल 22 साल के हो चुके थे तब उन्होंने कक्षा 10वीं  परीक्षा पास की थी।

5. क्या पटेल ने, कॉलेज की शिक्षा प्राप्त की थी?

जैसा कि, हमने आपको बताया कि, पटेल का जन्म एक गरीब किसान परिवार में, हुआ था और उन्हें आर्थिक तंगहाली उन्हें विरासत में मिली थी।

लेकिन इसके बावजूद पटेल के पिता श्री. झावेरभाई पटेल ने कॉलेज भेजने का प्रबंध किया था लेकिन घर की आर्थिक स्थिति देखते हुए पटेल ने इस प्रबंध को स्वीकार नहीं किया और 3 सालों तक घर पर रहते हुए ही जिलाधिकारी बनने का स्वाध्याय अध्ययन किया और परीक्षा में, गौरवपूर्ण सफलता अर्जित की।

6. पटेल ने, कानून अर्थात् लॉ की शिक्षा कब और कहां से प्राप्त की?

पटेल पारिवारीक कारणों की वजह से कॉलेज तो नहीं गये थे लेकिन साल 1910 में, पटेल ने, लॉ अर्थात् कानून की पढ़ाई करने के लिए इग्लैंड जाने का निर्णय लिया।

जैसा कि, हम, जानते है कि, पटेल पहले कभी कॉलेज नहीं गये थे इसलिए उनके पास कॉलेज की आम जानकारी भी नहीं थी लेकिन अपने विषय में, उनकी इतनी गहरी और प्रगतिशील रुचि थी कि, पटेल ने, 36 महिनों वाले कानूनी पढाई अर्थात् लॉ के कोर्स को मात्र 30 महिनों में, ही पूरा करते हुए पूरे कॉलेज में, टॉप करते हुए अपनी शैक्षणिक प्रतिभा के झंडे गाड़ दिये।

7. पटेल का वैवाहिक जीवन कैसे शुरु और समाप्त हुआ?

लौह पुरुष कहे जाने वाले जनप्रिय नेता सरदार वल्लभ भाई पटेल का विवाह भी उस समय के गुजराती बाल विवाह की प्रचलित प्रथानुसार सिर्फ 16 साल की आयु में, साल 1891 में, झावेरबा से कर दिया गया था।

लेकिन उनकी ये शादी ज्यादा समय तक नहीं चल पाई क्योंकि साल 1909 को झावेरबा को अपनी जान कैंसर नामक घातक बीमारी के हवालें करनी पड़ी।

जब उनकी पत्नी की मृत्यु हुई थी जब पटेल अपने कर्तव्य अर्थात् अदालत में, काम रहे थे लेकिन पत्नी की मृत्यु की जानकारी पाकर भी उन्होंने अपना काम नहीं रोका बल्कि कार्य की समाप्ति के बाद पत्नी के पास पहुंचे और साथ ही साथ पत्नी निधन की जानकारी को सार्वजनिक किया और अपना बाकी जीवन अपने पुत्र दहयाभाई पटेलबेटी मणिबेन पटेल के साथ बिताया।

इस प्रकार हम, पटेल के भीतर छुपे कर्तव्यपरायण व दायित्वनिष्ठ व्यक्तित्व की छवि को देख सकते हैं।

8. ब्रिटिश सरकार के खिलाफ पटेल का शुरआती आक्रोश कब देखने को मिला?

बहुत कम लोग जानते हैं कि, पटेल ने शुरआती दौर में, ब्रिटिश सरकार के खिलाफ कब अपने आक्रोश को सहजता से प्रकट किया था।

कहा जाता है कि, जब पटेल अपनी कानूनी पढ़ाई को समाप्त करके गुजरात वापस लौटे तब उन्होंने गुजरात के गोधरा में, ही अपना अभ्यान / प्रैक्टिस शुरु किया था जिससे उनकी निखरती हुई कानूनी प्रतिभा को देख ब्रिटिश सरकार ने, उन्हें कई महत्वपूर्ण ओहदें / पद देने की कोशिश की थी लेकिन ब्रिटिश कानूनों की नापसंदगी की वजह से पटेल ने, उनके तमाम प्रस्तावों के सिरे से ही ठुकरा दिया था।

और इस प्रकार पटेल ने, शुरुआती दौर में ही ब्रिटिश सरकार के खिलाफ अपने आक्रोश को सहजतापूर्वक प्रकट करना शुरु कर दिया था।

9. पटेल, गांधी के अनुयायी कैसे बनें?

पटेल की जीवनी उकेरने वाले कई जीवनी लेखकों का ऐसा कहना है कि, पटेल ने, स्वतंत्र रुप से खुद को वकालत में, झौंक दिया था और साथ ही साथ वे उन दिनों गुजरात क्लब के मेंबर भी बन गये थे और इसी दौरान एक दिन उन्होंने गांधीजी के वक्तव्य / लैक्चर को सुना जो कि, उनके जीवन की दशा व दिशा के लिए मील का पत्थर साबित हुआ।

इस प्रकार पटेल ने, गांधी जी को अपना राजनीतिक गुरु स्वीकार किया और उनके नक्शे कदम पर चलकर पटेल ने, राजनीति में, अपने पैर जमायें।

10. पटेल ने कब इस दुनिया को अलविदा कहा?

सरदार वल्लभ भाई पटेल 1950 के दशक से ही बिमार रहने लगे थे और उन्हें कई तरह की स्वास्थ्य संबंधित गंभीर बिमारीयों ने भी घेर लिया था जिसके नतीजतन 2 नवंबर, 1950 को पटेल इतने बिमार हो गये थे कि, उनके लिए उठ पाना भी मुश्किल हो गया था।

अंत, 15 दिसम्बर, 1950 को उन्हें असहनीय दिल का दौरा पड़ा और यही उनकी मृत्यु का कारण भी बना जिसके फलस्वरुप भारत के बिस्मार्क, Iron Man of India और भारत के लौह स्तम्भ कहे जाने वाले इस दिग्गज व जुझारु नेता ने भारत, भारतीय राजनीति और दुनिया से अलविदा कह दिया।

ऊपर बताये गये सभी बिदुंओ की मदद से हमने सरदार वल्लभ भाई पटेल की जीवन-रेखा को खींजने की कोशिश की है लेकिन हमारे ये कोशिश तब तक अधूरी रहेगी जब तक कि, हम, Iron Man of India अर्थात् पटेल के राजनैतिक सफर को अस्तित्वमान ना कर दें।

Political Introduction of Sardar Vallabhbhai Patel? : सरदार वल्लभ भाई पटेल का राजनैतिक परिचय?

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 आपकी अच्छाई आपके मार्ग में, बाधक है इसलिए अपनी आंखों को क्रोध से लाल होने दीजिए और अन्याय का मजबूत हाथों से सामना कीजिए।  – सरदार पटेल

जिस प्रकार एक शब्द, वाक्य या गघांश में हम, वल्लभ भाई पटेल की जीवनी को प्रस्तुत नहीं कर सकते हैं ठीक उसी प्रकार सरदाल वल्लभ भाई पटेल का राजनैतिक परिचय को प्रस्तुत करने के लिए भी हम कुछ बिंदुओं की मदद लेंगे जो कि, इस प्रकार से हैं –

1. पटेल की गांधी से मुलाकात व राजनीति की शुरुआत कैसे हुई?

हम, ये तो जानते है कि, पटेल ने, गांधी जी के एक लैक्चर से प्रभावित होकर उन्हें अपना राजनीतिक गुरु मान लिया था और उनके बताये कदमो पर चलते हुए पटेल ने राजनीति में, अपना पर्दापण किया था।

लेकिन हम, यहां पर अपने सभी पाठकों व राजनीतिक के विद्यार्थियों को बताना चाहते हैं कि, पटेल की गांधी से पहली मुलाकात साल 1917 में, हुई थी लेकिन राजनीतिक की शुरुआत साल 1918 में हुई थी।

राजनीति की शुरुआत साल 1918 में इस प्रकार हुई कि, गुजरात के अहमदाबाद में उस समय भारी और भीषण अकाल पड़ा था और साथ इंफ्लुऐंजा का रोग भी महामारी बनकर फैला था जिसकी रोकथाम के लिए पटेल ने, अहमदाबाद नगर पालिका से एक बड़ी धनराशि प्राप्त करने में, मदद की थी ताकि पर्याप्त मात्रा में, अस्पतालों की व्यवस्था करके महामारी को रोका जा सकें।

2. खेड़ा संघर्ष का पटेल के राजनीतिक जीवन में, क्या योगदान हैं?

हम, अपने पाठको को बता दें कि, खेड़ा संघर्ष से ही पटेल को वास्तविक मायनों में, राजनीतिक पहचान मिली थी क्योंकि साल 1918 में, खेड़ा स्वतंत्रता आंदोलन का सबसे बड़ा केंद्र बनकर तो उभरा ही था साथ ही साथ सूखे की भयानक मार भी झेल रहा था।

और दूसरी तरफ अंग्रेजी हुकुमत द्धारा बड़े पैमाने पर भूमि राजस्व अर्थात् कर वसूला जा रहा था जिसके खिलाफ में पटेल, गांधी व अन्य लोगो ने, संगठित होकर NO – TAX नामक आंदोलन चलाया जिसकी मदद से पटेल ने, ना केवल इस वसूली को समाप्त किया बल्कि गुजरात सभा को गुजरात सूबे की कांग्रेस समिति में, बदल दिया जिसके सचीव खुद सरदार वल्लभ भाई पटेल बने और अध्यक्ष महात्मा गांधी को बनाया गया।

इस प्रकार हम, कह सकते हैं कि, खेड़ा संघर्ष का पटेल के राजनीतिक जीवन में, शुरुआती अमूल्य योगदान रहा हैं।

3. 1920 के असहयोग आंदोलन में, पटेल का क्या योगदान रहा?

असहयोग आंदोलन भी पटेल के योगदान से परिपूर्ण हुआ था क्योंकि सरदार वल्लभ भाई पटेल ने, स्वदेशी का प्रचार-प्रसार करते हुए धोती, कुर्ता, खादी व स्वदेशी चप्पलों को अपनाने का निवेदन किया और साथ ही साथ विदेशी वस्तुओँ की होली भी जलाई।

1920 के असहयोग आंदोलन में, पटेल के योगदान को इन बिंदुओं की मदद से उजागर किया जा सकता है जो कि, इस प्रकार से हैं –

  • पटेल ने, स्वदेशी को अपनाने पर जोर दिया और विदेशी वस्त्रों व वस्तुओँ की होली जलाई,
  • अहमदाबाद नगर पालिका चुनावों की सभी सींटो पर खुली जीत दर्ज की,
  • असहयोग आंदोलन को आगे बढ़ाते हुए पटेल ने तिलक स्वराज फंड के लिए कुल 10 लाख रुपयों की व्यापक धनराशि को एकत्र करने में योगदान दिया,
  • भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस को प्रभावशाली और दीर्घगामी बनाने के लिए पटेल ने, अकेले गुजरात में, ही कांग्रेस की सदस्य संख्या बढ़ाने के लिए कुल 3 लाख लोगो को सीधे तौर पर इस पार्टी से जोड़ा,
  • गांधी का पूर्ण सहयोग प्राप्त करते हुए पटेल ने, गुजरात विघापीठ की स्थापना का निर्णय लिया आदि।

उपरोक्त बिंदुओं की मदद से हमने पटेल के असहयोग आंदोलन के योगदान को उजागर करने के प्रयास किया है।

4. 1929 का लाहौर अधिवेशन में पटेल की हार कैसे हुई?

ऐसा माना जाता कि, शुरु से ही सरदार वल्लभ भाई पटेल और पंडित जवाहर लाल नेहरु के बीच गला-काट प्रतिस्पर्धा देखने को मिली और ऐसा भी कहा जाता हैं कि, इस प्रतिस्पर्धा में, पटेल को हार झेलनी पड़ी थी।

1929 के लाहौर अधिवेशन मे, पटेल को गांधी के बाद दूसरे नंबर का प्रबल दावेदार माना गया लेकिन चूकिं पटेल की छवि मुस्लिमों को लेकर अच्छी नहीं थी इसलिए गांधी के अनुरोध पर ही पटेल को अपना नाम वापस लेना पड़ा और इस प्रकार 1929 के लाहौर अधिवेशन में, उनकी हार हुई।

5. क्या गांधी की वजह से पटेल प्रधानमंत्री बनने से चूक गये थे?

हम, सभी जानते हैं कि, गांधी जी का नेहरु जी से गहरा प्रेम संबंध था जिसकी वजह से ना केवल 1929 के लाहौर अधिवेशन मे ही पटेल को हार झेलनी पड़ी थी बल्कि साल 1945-1946 के दौरान भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस अघ्यक्ष पद के लिए भी पटेल प्रबल दावेदार थे लेकिन इस बार भी गांधी के जी नेहरु प्रेम ने, पटेल को जीत हासिल नहीं करने दी अर्थात् वे प्रधानमंत्री नहीं बन पायें।

कई राजनीतिकि विश्लेषकों व इतिहासकारों का ऐसा भी मानना रहा हैं कि, यदि पटेल को प्रधानमंत्री बनाया गया होता तो भारत के दो शुरुआती युद्ध अर्थात् चीन व पाकिस्तान के साथ हुए युद्ध में, भारत को गौरवपूर्ण विजय प्राप्त होती।

6. पटेल को बारडोली सत्याग्रह से कैसे मिली सरदार की उपाधि?

बारडोली सत्याग्रह साल 1928 में, शुरु किया गया एक प्रमुख किसान आंदोलन था जिसकी अगुवाई सरदार वल्लभ भाई पटेल कर रहे थे।

पटेल ने बारडोली सत्याग्रह के दौरान अंग्रेजी सरकार द्धारा किसानों पर लगाये गये 30 प्रतिशत लगान को कम करने में, पुरजोर कोशिश की और परिणामस्वरुप पटेल ने, इस 30 प्रतिशत के लगान को 6.03 प्रतिशत तक दिया और इस प्रकार बारडोली सत्याग्रह से पटेल की राजनीतिक छवि उभर कर आई।

इस लोकप्रिय जन-नायक व लोक-नायक नेता की छवि को आम जनता ने, स्वीकार किया और उन्हें सरदार की उपाधि से विभूषित किया जो कि, आज तक बरकरार है।

ऊपर बतायें गये बिंदुओं की मदद से हमने पटेल के राजनैतिक सफर को स्पष्ट करने का प्रयास किया ताकि हमारे सभी पाठक पटेल की राजनीतिक यात्रा को करीब से देख पायें।

स्वतंत्र भारत व देशी रियासतों के एकीकरण में पटेल की क्या भूमिका रही?

यहां तक कि, यदि हम हजारों की दौलत गंवा दें और हमारा जीवन बलिदान हो जाये तो भी हमें, मुस्कुराते रहना चाहिए और ईश्वर एंव सत्य में, विश्वास रखकर प्रसन्न रहना चाहिए। – सरदार पटेल

जैसा कि, हम सभी जानते हैं कि, सरदार वल्लभ भाई पटेल ने, गांधी के अनुरोध पर ही प्रधानमंत्री की दौड़ में, आगे होते हुए भी खुद को पीछे किया और प्रधानमंत्री पद का मोह त्याग दिया लेकिन फिर भी पटेल ने, अपनी जिम्मेदारीयां निभाते हुए स्वतंत्र भारत के प्रथम गृह मंत्रीउप-प्रधानमंत्री का पदभार संभाला।

लेकिन नेहरु और पटेल की पुरानी प्रतिस्पर्धा जारी रही जिसकी वजह से कई बार दोनो नेताओं ने, अपने-अपने पदों को त्यागने की सार्वजनिक धमकी भी दे दी।

पटेल की राजनीतिक कुशलता को इसी से आंका जा सकता है कि, देशी रियासतों के विलय पर गांधी ने, पटेल को लिखा था कि, ’’ रियासतों की समस्या इतनी जटिल थी जिसे केवल तुम ही हल कर सकते थे। ’’

स्वतंत्र भारत के पहले गृह मंत्री रहते हुए सरदार वल्लभ भाई पटेल के सामने कुल 562 देशी रियासतों को एकीकृत करने की चुनौतीपूर्ण जिम्मेदारी थी जिसे सरदार वल्लभ भाई पटेल ने, अपनी राजनीतिक कुशलता का तीक्ष्ण प्रमाण व परिचय देते हुए बिना एक बुंद खून बहाये पटेल ने, 562 देशी रियासतों का भारत में, विलय किया।

पटेल को केवल हैदराबाद की देशी रियासत का भारत में, विलय करने के लिए सेना भेजनी पड़ी जिसके लिए उन्होंने ऑपरेशन पोलो को लांच किया था जबकि कश्मीर व जूनागढ़ रियासत को कुछ हल्के-फुल्के राजनीतिक उठा-पठक के बाद भारत में, विलय करा दिया गया।

इस प्रकार हम, कह सकते हैं कि, सरदार वल्लभ भाई पटेल का स्वतंत्र भारत के निर्माण में, भारी और अमूल्य योगदान रहा है।

सरदार वल्लभ भाई पटेल और नेहरू के चारित्रिक जीवन में, क्या अन्तर था?

जो तलवार चलना जानते हुए भी तलवार को म्यान में रखता है, उसी की अहिंसा सच्ची अहिंसा कही जाएगी। कायरो की अहिंसा का मूल्य ही क्या? और तक अहिंसा को स्वीकारा नहीं जाता तब तक शांति कहा?   – सरदार पटेल

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पटेल व नेहरु में, कुछ मौलिक समानतायें भी थी जैसे कि – दोनो ही नेताओं ने लंदन जाकर कानून की डिग्री प्राप्त की थी, दोनो ही राष्ट्रपिता महात्मा गांधी के बेहद करीब थे और साथ ही साथ दोनो का भारतीय स्वतंत्रता संघर्ष में, अमूल्य योगदान रहा था लेकिन दोनो के बीच अनेको मौलिक अन्तर भी थे।

नेहरू व पटेल के बीच अनेको मौलिक व बुनियादी अन्तर है जैसे कि – नेहरु मूलत एक कश्मीरी ब्राह्मण परिवार से संबंधित थे जबकि पटेल गुजरात के किसान परिवारकिसान समुदाय से आते थे, नेहरु समाजवादी विचारों को अपना आदर्श मानते थे जबकि पटेल व्यापार व वाणिज्य के प्रति सहज / नरम विचार रखने वाले एक खांटी हिंदू थे, नेहरु और पटेल के बीच अनेको मुद्दो पर मतभेद थे जैसे कि, कश्मीर मुद्दे पर दोनो के विचारो में, जमीन-आसमान का अन्तर था आदि।

नेहरू अनेको शास्त्रो के जनक थे तो पटेल उनक शास्त्रो की आराधना करते थे, नेहरु किसी भी काम से पहले लम्बी विचार यात्रा करते थे जबकि पटेल उन कामों को कर डालते थे और परिणामों को अपने अनुकूल बनाने का प्रयास करते थे, नेहरु को देहार की धूल-घूसरित जीवन-शैली पंसद नहीं थी जबकि पटेल ग्रामीण मिट्टी में, ही पैदा हुए थे।

सरदार वल्लभ भाई पटेल और Statue of Unity की कहानी क्या है?

सरदार वल्लभ भाई पटेल वो व्यक्तित्व है जो कि, भी पहचान के मोहताज नहीं है जिसे प्रमाणित व सम्मानित करने के लिए सरदार वल्लभ भाई पटेल की 137वीं जयंती पर तत्कालीन गुजरात के मुख्यमंत्री श्री. मोदी ने, 31 अक्टूबर, 2013 को Statue of Unity नाम स्मारक की आधारशिला रखी थी।

Statue of Unity की कुल ऊंचाई 240 मीटर है, इसका आधार / बेस 58 मीटर का है और मूर्ति की कुल ऊंचाई 182 मीटर है जो कि, Statue of Liberty से दुगुनी है। वर्तमान में, इस स्मारक या प्रतिमा गुजरात के छोटे चट्टानी द्धीप साधू बट जो कि, केवाडिया में, सरदार सरोवर बांध व नर्मदा नदी के बीचो-बीच सुशोभित है।

उल्लेखनीय तथ्य ये भी है कि, इस प्रतिमा की आधाशिला भी मोदी ने ही रखी थी और साल 2018 में, जब ये प्रमिता बनकर तैयार हुआ तो इसका उद्घाटन भी 31 अक्टूबर, 2018 को मोदी के द्धारा ही किया गया और राष्ट्र के महानायक की इस प्रतिमा को सभी भारतवासियों को समर्पित कर दिया गया।

सरदार वल्लभ भाई पटेल की उल्लेखनीय उपलब्धियां क्या रही?

शत्रु का लोहा भले ही गर्म हो जाये पर हथौड़ा तो ठंडा होकर ही काम दे सकता है। – सरदार पटेल

पटेल का व्यक्तित्व स्वयं मे ही एक उपलब्धि था जिससे ना केवल तत्कालीन भारतवर्ष को प्रेरणा व प्रोत्साहन मिला बल्कि वर्तमान दौर में, भी हमारे राजनीतिक के युवाओं को उनके प्रेरणा व प्रोत्सान की प्राप्ति हो रही है। पटेल की उपलब्धियों को हम, कुछ बिंदुओं की मदद से आपके समक्ष प्रस्तुत करना चाहेंगे जो कि, इस प्रकार से हैं-

  1. पटेल ने ही आधिकारीक तौर पर भारतीय प्रशासनिक सेवाओँ का भारतीयकरण किया अर्थात् ICS को IAS में, बदला,
  2. पटेल को उनकी सफलताओँ और देश-सेवा के लिए मरणोपरान्त साल 1991 मे, भारत के सर्वोच्च नागरिक सम्मान अर्थात् भारत रत्न से सम्मानित किया गया जिन्हें इनके पौत्र विपिनभाई पटेल द्धारा ग्रहण किया गया
  3. गुजरात में, उनके सम्मान में, सरदार पटेल विश्वविघालय की स्थापना भी की गई और
  4. अहमदाबाद में, एक हवाई अड्डे का नाम भी सरदार वल्लभ भाई पटेल अन्तर्राष्ट्रीय हवाई अड्डा रखा गया।

अंत, हमने आपको कुल मौलिक बिंदुओं की मदद से सरदार पटेल की उपलब्धियों की एक तस्वीर प्रस्तुत करने का प्रयास किया है।

सारांश:

नि-संदेह बेहतर होता यदि नेहरु को विदेश मंत्री व सरदार पटेल को प्रधानमंत्री बनाया जाता। यदि पटेल कुछ दिन और जीवित रहते तो वे प्रधानमंत्री के पद पर अवश्य पहुंचते जिसके लिए वे संभवत योग्य पात्र थे। – चक्रवर्ती राजगोपालचारी

भारत के बिस्मार्क के नाम से सम्मानित और भारतीय राजनीति के लौह पुरुष / Iron Man of India की उपाधि से सुशोभित श्री. सरदार वल्लभभाई पटेल की सभी उपलब्ध जानकारी को हमने अपने इस लेख में, Sardar Vallabhbhai Patel Biography in Hindi : सरदार वल्लभ भाई पटेल का जीवन परिचय के शीर्षक तले प्रस्तुत करने का प्रयास किया है।

अंत, जिस प्रकार पटेल ने, भारत को एकता व अखंडता के अटूट सूत्र में, बांधा था उसी प्रकार हमारे वर्तमान राजनीतिक भी भारत को एकता व अखंडता की मिशाल बनायें और राजनीति के विद्यार्थी राजनीति के इस लौह पुरुष से प्रेरणा व प्रोत्साहन प्राप्त करें यही हमारे इस लेख का मौलिक लक्ष्य है।

हम, अपने सभी पाठकों व विद्यार्थियों से आशा करते हैं कि, वे हमारे इस लेख को अधिकाधिक मात्रा में, लाइक करेंगे, शेयर करेंगे और सभी संभव सुधारों के लिए कमेंट करके हमें बतायेगे ताकि हम, इसी प्रकार के गुणवत्तापूर्ण लेख आप की सेवा में, अर्पित व समर्पित करत रहें।

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