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Moral Stories In Hindi: जीवन बदलने वाली कहानियां हिंदी में…!

Moral Stories In Hindi
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 बचपन में आपने अपने दादा-दादी तथा अपने बड़ों से जरूर कुछ अच्छी – अच्छी कहानियां सुनी होंगी हमें इन कहानियों से ही जीवन में कुछ करने के लिए अच्छी सीख मिलती है तो दोस्तों आज मैं आपके लिए Moral Stories In Hindi में जीवन बदलने वाली कहानियां लेकर आया हूं यह कहानियां बच्चों के साथ – साथ बड़ों के लिए भी काफी प्रेरणादायक है तथा नैतिकता का ज्ञान देता है सभी कहानी के अंत में हमें कुछ ना कुछ जरूर सीखने को मिलता है इन कहानियों में बताई गई सिख हमें जीवन के किसी ना किसी मोड़ पर जरूर काम आती है इसलिए यह Moral Stories In Hindi पूर्ण पढ़ें

Table of Content

  • जीवन के असली भय से मुक्त – Moral Stories In Hindi
  • अनोखी लालच पर नया कहानी – Moral Stories In Hindi
  • किस की किस्मत ज्यादा अच्छी है – Moral Stories In Hindi
  • जो होता है अच्छे के लिए होता है – Moral Storie In Hindi
  • मन लगाकर काम नहीं करने का नतीजा – Moral Storie In Hindi
  • मेरी मूर्ति सर्वश्रेष्ठ है – Moral Storie In Hindi
  • परिस्थिति से समझौता – Moral Storie In Hindi
  • आंख खोल देने वाला – Moral Storie In Hindi

1. जीवन के असली भय से मुक्त – Hindi Short Stories with Moral

Moral Stories In Hindi

एक गांव में एक श्याम नाम का नव जवान रहता था उसने अपने जीवन में कुछ करने की ठानी और उसने सोचा अगर मुझे जीवन में कुछ बड़ा करना है तो मैं क्या करूं ? उसने सोचा जीवन में अगर मैं किसी भी चीज से न डरने लगू और जीवन में Fearless हो जाऊं तो बात बन सकती है और ऐसा सोचकर श्याम जंगलों में चला गया। श्याम ने जंगलों में जाकर सिद्धियां पानी शुरू की, श्याम ने जंगलों में निरंतर 10 – 12 सालों तक तपस्या की और श्याम को कुछ सिद्धियां प्राप्त हो गई।

श्याम की सिद्धियां इतनी बढ़ चुकी थी कि श्याम अब किसी भी चीज से नहीं डरता था वह जंगलों में निरंतर तपस्या करता रहता था उस घने जंगल में आसपास के गांव के लोग जाने से भी डरते थे क्योकि वह जंगल खूंखार जंगली जानवरों से भरा पड़ा था श्याम अपनी तपस्या में इतना लीन रहता था, की अगर उसके आसपास से जंगली जानवर भी चले जाए तो उसे फर्क नहीं पड़ता था। श्याम महीनों हफ्तों एक जगह पर बैठकर तपस्या किया करता था श्याम के शरीर पर सांप भी चलने लगे फिर भी उसके रोंगटे खड़े नहीं होते थे।

कुछ समय बीतने लगी और आसपास के गांव तथा शहर में श्याम के बड़े चर्चे होने लगे अब श्याम को बहुत ज्ञानी संत समझने लग गया। बाबा श्याम से मिलने के लिए दूर-दूर से लोग आने लगे तभी एक युवक को बाबा श्याम के बारे में पता चला। उस युवक ने सोचा मुझे इस महान संत बाबा श्याम के पास एक बार जरूर जाना चाहिए और जीवन में भय से मुक्त होने का पाठ सीखना चाहिए।

फिर क्या हुआ

वह युवक बाबा श्याम के पास चला गया और बाबा श्याम से वह युवक कहने लगा मुझे जीवन में भय से मुक्ति चाहिए मुझे आप अपनी शरण में ले लीजिए और मुझे ईश्वर को पाना है, इसलिए मुझे जीवन में भय से मुक्ति चाहिए बाबा श्याम कहने लगे तुम सही जगह पर आए हो। तुम्हें मैं ईश्वर को पाने का मार्ग बताऊंगा ईश्वर को पाने के लिए मुझे भय से मुक्त होना पड़ेगा। बाबा श्याम कहने लगे मुझे किसी भी चीज से भय नहीं होता और बाबा श्याम उस युवक को समझा रहे थे।

उसी दौरान एक शेर वहां पर आ गया और जोर से दहाड़ मारी फिर भी बाबा श्याम को बिल्कुल भी फर्क नहीं पड़ा और उसके शरीर के एक बाल भी खड़े नहीं हुए इधर युवक के पसीने छूटने लगे थे बाबा श्याम ने कहा देखा मुझे भय से आजादी मिल चुकी है।

युवक कुछ देर शांत था बाबा श्याम ने उस युवक की हालत देखी और अपनी कुटिया से उस युवक के लिए पानी लाने चले गए जहां पर बाबा श्याम तपस्या करते थे वहीं पर उस युवक ने एक धार्मिक ग्रंथ के कुछ मंत्र लिख दिए जब बाबा श्याम कुटिया के बाहर आए तब वह अपने स्थान पर बैठने वाले थे। तभी उसने अपने पैर उस चट्टान पर रखना चाहा लेकिन वहां पर मंत्र लिखे हुए थे उसने अपने पैर झट से हटा लिए तभी उस युवक ने कहा बाबा जी आपको तो किसी भी चीज से डर नहीं लगता तो आप इस मंत्र से कैसे डर रहे हैं।

उस युवक ने कहा आपको भले ही स्वाभाविक डर नहीं लगता हो लेकिन आपको अभी भी आंतरिक डर है उस युवक ने कहा मेरा डर तो स्वाभाविक है मैं एक बार ईश्वर को पा भी लूं लेकिन आप कभी नहीं पा सकते।

जीवन के असली भय से मुक्त Moral Stories से हमें क्या सीखने को मिला

अगर हमें सही मायने में निडर होना है तो हमें अपने बाहरी डर से पहले अपने आंतरिक डर पर विजय होना पड़ेगा तब जाकर हम सही मायनों में निडर बनेंगे।

2. अनोखी लालच पर नई कहानी – Panchatantra Short Stories in Hindi with Moral

Moral Stories In Hindi

एक जंगल में एक बंदर रहता था वह बहुत सुंदर बंदर था। वह बंदर के पास खाने-पीने के बहुत सारे सामान मौजूद हुआ करते थे। वह बंदर हमेशा खाने पीने की सामान इकट्ठा किया करता था। खाने पीने की सामान इकट्ठा करने का लालच वह बंदर में धीरे-धीरे बढ़ने लगा था, शहर से शिकारी सर्कस में काम कराने के लिए बंदर पकड़ने की योजना बनाने लगे।

वह शिकारी ने बंदर पकड़ने के लिए एक तरकीब लड़ाई उसने एक बोतल लिया वह बोतल में शिकारी ने थोड़े से चने रख दिया शिकारी जानता था कि चने बंदरों के सबसे स्वादिष्ट भोजन में से एक है। उस बोतल को शिकारी ने पेड़ पर लटका दिया वह बोतल का मुंह छोटा सा था वह बोतल को शिकारी ने एक लंबे पेड़ पर लटका दिया और एक रात इंतजार करने लगा, वह लालची बंदर ने वह चले से भरी बोतल देख ली।

चने से भरी बोतल को देखते ही लालची बंदर वह पेड़ पर चढ़ गया और उस बोतल के मुंह पर अपना हाथ डालकर चने को मुट्ठी में भर लिया। अब बंदर की मुट्ठी चने से भरी हुई थी वह अपना हाथ उस बोतल से निकालने की कोशिश करने लगा वह नहीं निकाल पा रहा था। बंदर इतने लालच में था कि वह समझ ना सका अगर वह मुट्ठी खोलता तो वह आसानी से अपना हाथ बाहर निकाल सकता था।

अनोखी लालच पर Moral Stories से हमें क्या सीखने को मिला

यह कहानी Story Kids के लिए है लेकिन बड़े भी इस कहानी से बहुत सारा चीज सीख सकते हैं हमें इस Moral Storie से सीख मिलती है कि हमें कभी भी लालच नहीं करना चाहिए।

3. किस की किस्मत ज्यादा अच्छी है – Moral Stories In Hindi

Moral Stories In Hindi

एक शहर के इलाके में दो बच्चे रहा करते थे उन दोनों का नाम राहुल और मोहन था जिनमें से राहुल बहुत ही अमीर घर का बच्चा था और मोहन एक मिडिल क्लास घर का बच्चा था। राहुल के पास सभी प्रकार की ऐसो आराम थी वह एक बड़े से गाड़ी में अपनी स्कूल जाता था उसके घर में बहुत बड़े गार्डन थे। उसके घर में ढेर सारे नौकर थे। राहुल के पास हजारों तरह के खिलौने थे। राहुल का घर काफी शानदार और आलीशान था और एक तरफ मोहन था।

जिसका घर काफी छोटा था और उसके पापा के पास एक छोटी सी बाइक थी। मोहन के पास राहुल की तरह हजारों तरह के खिलौने नहीं थे। उसके पास मुश्किल से दो या तीन खिलौने थे। राहुल अपने बड़े के घर से बालकनी में जाकर मोहन को उसके दोस्तों के साथ खेलते देखता था। राहुल एक हाईप्रोफाइल घर का लड़का था इसलिए वह छोटे घर के बच्चों के साथ नहीं खेल सकता था। इसलिए वह दूर से ही उनको खेलते देखता था। राहुल को अंदर ही अंदर बहुत ही रोना आता था क्योंकि उसका कोई दोस्त नहीं था और उसे भी मोहन जैसे सारे खेल खेलने थे।

दूसरी तरफ मोहन था। मोहन भी कभी-कभी राहुल को देखा करता था क्योंकि मोहन को राहुल की गाड़ी और उसका आलीशान घर बहुत अच्छा लगता था। राहुल के घर में ढेर सारे नौकर थे तो मोहन भी चाहता था कि हमारे घर पर भी ढेर सारे नौकर रहे। हमारा घर भी बढ़ा रहे ऐसा सोचकर राहुल और मोहन दुखी रहा करते थे।

किस की किस्मत ज्यादा अच्छी है Moral Stories से हमें क्या सीखने को मिला

सही मायने में देखा जाए तो उन दोनों में से अर्थात राहुल और मोहन में से कोई खुश नहीं है क्योंकि उन दोनों को एक दूसरे के चीजों से प्यार है उन्हें कुछ पाने की चाहा है और लालच कभी पूरी नहीं होती इसलिए वह हमेशा दुखी रहते हैं।

4. जो होता है अच्छे के लिए होता है – Moral Stories In Hindi

Moral Stories In Hindi

एक बार राजा अकबर और बीरबल शिकार पर जा रहे थे। अकबर के साथ सिपाही एवं उनके हाथी घोड़े भी थे। बीच जंगल में उन्हें एक शिकार दिखा तभी अकबर ने अपना तलवार निकाला और इसी दौरान तरवार निकालते निकालते अकबर का हाथ कट गया और उसके हाथ से खून बहने लगा।

अकबर ने अपने सिपाहियों से वैध को बुलाने के लिए चिल्लाकर कहा उसी दौरान बीरबल ने राजा के हाथ देखें और अकबर से कहा राजा जी घबराइए नहीं जो होता है अच्छे के लिए होता है। बीरबल की यह बात सुनकर राजा अकबर बहुत क्रोधित हो गए और कहने लगे हे बीरबल तुम पागल हो क्या, तुम्हें मेरी पीड़ा नहीं दिखाई देती। जो तुम बोल रहे हो, जो होता है अच्छे के लिए होता है। भला इसमें क्या अच्छा हुआ मेरा हाथ कट गया।

और क्रोधित होकर राजा अकबर ने बीरबल को अपने सिपाहियों को सौंप दिया और सुबह उसे फांसी की सजा देने का ऐलान करवा दिया। बीरबल अकेले ही शिकार पर चले गए जब राजा अकबर शिकार पर जा रहे थे। तभी वह जंगल के काफी अंदर चले गए और तभी अकबर को एक कबीले के झुंड ने पकड़ लिया और उन कबीले वासियों ने राजा अकबर को जिंदा जलाने का फैसला किया। जब अकबर को जलाया जा रहा था तब कबीले वासी के एक सदस्य ने राजा के हाथ को देखा और कहने लगे की इस राजा के हाथ कटे हुए हैं हम इसे नहीं जला सकते क्योंकि यह अशुद्ध है।

फिर क्या हुआ

फिर अकबर को छोड़ दिया गया। तभी अपने महल जाते जाते अकबर को याद आया कि बीरबल ने उससे क्या कहा था कि जो होता है अच्छे के लिए होता है । मन ही मन अकबर अपने फैसले पर बहुत दुखी था और तेजी से सुबह होने से पहले अकबर अपने महल पहुंचकर बीरबल को बचाना चाहता था और सुबह होने से पहले अकबर अपने महल पहुंच गया और बीरबल को बचा लिया।

राजा अकबर बीरबल से माफी मांगने लगे तभी बीरबल ने अकबर से कहा कि महाराज जो होता है अच्छे के लिए होता है। तभी राजा एक बार फिर क्रोधित हुए और बोले बीरबल इसमें क्या अच्छी बात है। तुम अभी मरने वाले थे तभी बीरबल ने अकबर से कहा कि महाराज अगर मैं आपके साथ शिकार पर चले जाता तो वह कबीले वाले मुझे जला देते।

जो होता है अच्छे के लिए होता है Moral Storie से हमें क्या सीखने को मिला

जो होता है अच्छे के लिए होता है Moral Storie से हमें यह बात सीखने को मिली की जो भी होता है अच्छे के लिए होता है इसलिए हमें किसी भी छोटी-छोटी बात पर ज्यादा टेंशन और लड़ने की जरूरत नहीं है।

5. मन लगाकर काम नहीं करने का नतीजा – Moral Stories In Hindi

Moral Stories In Hindi

एक शहर में एक होनहार कारीगर था जो अपने मालिक के लिए बड़े-बड़े मकान बनाया करता था। उनके मालिक वह मकान बनने के बाद उसे अच्छे दामों पर बेच दिया करते थे। उस मालिक के लिए उस कारीगर ने हजारों घर बनवाए और उसे अच्छे दामों पर बेचा।

वह कारीगर अपने काम में बहुत ही होनहार था। उसने अपने मालिक को कभी नाराज नहीं किया था क्योंकि उसका काम बहुत ही अच्छा था। धीरे-धीरे वह कारीगर का मन घर बनाने से उतरने लगा और कुछ साल बाद वह कारीगर बूढ़ा हो गया अब उसका मन घर बनाने का बिल्कुल नहीं था इसलिए बूढ़ा कारीगर घर बनाने में आलस करने लगा था।

उसके मालिक ने उस कारीगर से कहा अगर आप अब घर बनाना नहीं चाहते हैं तो ठीक है लेकिन आप मेरे कहने पर एक आखरी घर बना दीजिए। उस घर को आप अपने मन से बनाइए और पैसे की चिंता मत कीजिए। उस कारीगर ने सोचा कि कोई बड़ा घर लेने के लिए आया होगा इसलिए मेरे मालिक फिर से मेरे से घर बनवाना चाहते हैं।

लेकिन कारीगर का मन अब घर बनाने में नहीं लगता था इसलिए उन्होंने अपनी मालिक की तो बात मानी लेकिन वह घर को अच्छे से नहीं बना रहा था। वह नाखुश मन से काम करने लगा था। वह अच्छे इंटीरियल एवं अच्छे फर्नीचर का यूज नहीं कर रहा था और घर भी अच्छा मजबूत नहीं बना था। उस कारीगर ने सोचा कि मुझे जैसे तैसे यह घर पूरा करके मेरे मालिक को दे देना है फिर क्या था। उसने जैसे तैसे करके कमजोर ढांचे वाले हिसाब से घर बना दिया।

उसके बाद क्या हुआ

जब घर बन कर पूरा हो गया तब उस कारीगर के मालिक वह घर को देखने के लिए आए और उस कारीगर के मालिक ने कहा तुमने मेरे लिए पूरा जीवन काम किया है इसलिए यह घर तुम्हारा है। उस कारीगर के पैरों तले जमीन खिसक गए और वह मन ही मन सोचने लगा मैंने यह क्या कर दिया।

मन लगाकर काम नहीं करने का नतीजा Moral Storie से हमें क्या सीखने को मिला

मन लगाकर काम नहीं करने का नतीजा Moral Storie से हमें यह सीखने को मिला कि हमें अपना काम बहुत मन लगाकर करना चाहिए और काम करते समय आलस नहीं करना चाहिए।

6. मेरी मूर्ति सर्वश्रेष्ठ है – Moral Storie In Hindi

Moral Stories In Hindi

एक गांव में मशहूर मूर्तिकार रहा करता था। उस मूर्तिकार का एक पुत्र भी था। वह मूर्तिकार इतना मशहूर था कि दूर – दूर से लोग उसकी मूर्तियां देखने तथा खरीदने के लिए आते थे एवं उसके कारीगरी को देखकर मुंह मांगा दाम देकर मूर्ति अपने घर ले जाया करते थे। मूर्तिकार और उसके पुत्र बहुत खुश थे। मूर्तिकार ने अपने पुत्र को भी मूर्ति बनाना सिखाने की सोची और मूर्तिकार ने अपने पुत्र को भी मूर्ति बनाना सीखना सिखाना चालू किया।

धीरे-धीरे उस मूर्तिकार का पुत्र अच्छी मूर्तियां बनाने सीखने लगा जब मूर्तिकार का पुत्र मूर्तियां बनाता था। तब वह मूर्तिकार अपने पुत्र को मूर्ति बनाने पर बार-बार वह मूर्तियों की खामियां निकालता था और उसका पुत्र अपने पिताजी के बताए गए खामियों को ठीक करता था और धीरे धीरे उसका पुत्र भी अच्छा मूर्तिकार बन गया।

जब मूर्तिकार का पुत्र मूर्ति बना लेता था तो उसके पिता उस मूर्ति में खामियां निकाला करते थे और एक समय ऐसा आया कि उस खामियों के चलते वह मूर्तिकार का पुत्र इतना सर्वश्रेष्ठ मूर्तियां बनाने लगा कि अब वह अपने पिता से भी अच्छा एवं अद्भुत मूर्तियां बनाता था।

अब धीरे-धीरे उस मूर्तिकार के पुत्र की मूर्तियां काफी ज्यादा कीमतों में बिकने लगी यह कीमत उस मूर्तिकार के मूर्तियों से भी ज्यादा था। लेकिन जब भी मूर्तिकार का पुत्र मूर्ति बनाता था तब मूर्तिकार कोई ना कोई खामियां उस मूर्ति में जरूर ढूंढ़ लेता था। कुछ साल तो यूं ही चला लेकिन एक बार मूर्तिकार का पुत्र अपने पिता से कहने लगा आप मेरी मूर्तियों में खामियां एसे निकालते हैं मानो आप कोई बड़े मूर्तिकार है और कहने लगा मेरी मूर्तियां आपसे ज्यादा अच्छी है और ज्यादा कीमत में बिकती है।

फिर क्या हुआ

उस दिन के मूर्तिकार ने अपने पुत्र के बनाए मूर्तियों में खामियां निकालना बंद कर दिया। कुछ महीने तो उस मूर्तिकार का काम अच्छा चला लेकिन धीरे-धीरे लोग मूर्तियों को पसंद करना बंद करने लगे और अब उस मूर्ति के लिए ज्यादा पैसे भी लोग नहीं देते थे। इस बात से तंग आकर मूर्तिकार का पुत्र अपने पिता से पूछने लगा जब से आप ने मूर्ति बनाने के बाद मेरी मूर्तियों में खामियां निकालना बंद किया है तब से मेरी बिक्री कम हो गई हैइस क्या आपको पहले से पता था कि ऐसा कुछ होने वाला हैइस मूर्तिकार ने कहा हां मुझे पता था ऐसा कुछ होगा क्योंकि आज से कुछ सालों पहले मेरे साथ भी ऐसा हुआ था। 

पिता मूर्तिकार ने कहा कि मेरे पिता शहर के जाने-माने मूर्तिकार थे लेकिन मेरे पिता के निकालें खामियों को मैं नजरअंदाज करता था और मैं नहीं चाहता कि तुम भी ऐसा करो मूर्तिकार ने अपने पुत्र से कहा कि बेटा जब तुम सीखना बंद कर देते हो तब धीरे-धीरे तुम्हारी वैल्यू कम होने लगती है इसलिए हमेशा जीवन में सीखना कभी बंद मत करो।

मेरी मूर्ति सर्वश्रेष्ठ है Moral Storie से हमें क्या सीखने को मिला

इस Moral Storie से हमें सीखने को मिला कि हमें कभी भी सीखना बंद नहीं करना चाहिए एवं जीवन में निरंतर सीखते रहना चाहिए। जब हम सीखना बंद कर देते हैं तो धीरे धीरे हमारी वैल्यू घटने लगती है।

7. परिस्थिति से समझौता – Moral Stories In Hindi

Moral Stories In Hindi

एक बार एक टीचर ने बच्चों को कुछ बातें सिखाने के लिए मेंढक का सहारा लिया टीचर ने बच्चों से कहा कि बच्चों आज मैं आपको एक बहुत बड़ी सीख देने जा रहा हूं। ऐसा कहकर टीचर ने बच्चों को इकट्ठा कर लिया और कहने लगे देखो बच्चों यह एक मेंढक है और मैं इसे जार में रख रहा हूं और इसमें मैं पानी डाल देता हूं बच्चे इसे आश्चर्य से देखने लगे उस टीचर ने उस जार को जो गर्म करने के लिए गैस में रख दिया।

धीरे-धीरे उस जार में रखें पानी गर्म होने लगी और वह मेंढक थोड़ा गर्म पानी को अर्जेस्ट करने लगा। अब पानी थोड़ा सा और गर्म हुआ फिर भी मेंढक में अपने शरीर का तापमान उस पानी के अनुसार ढाल लिया। अब पानी से भाप निकलने लगी तथा पानी उबलने लगा। तब उस मेंढक ने उस जार से छलांग लगाने की कोशिश की लेकिन काफी कोशिश के बाद मेंढक उस जार में से छलांग नहीं लगा पाया और उस जार पर ही मेंढक मर गया।

यह सब दिखाकर टीचर ने बच्चों से कहा कि बताओ बच्चों मेंढक को किसने मारा तो बच्चे कहने लगे गर्म पानी ने लेकिन टीचर कहने लगे बिल्कुल नहीं बच्चों मेंढक को उसकी सोच ने मारा क्योंकि जब पानी थोड़ा गर्म था तब वह मेंढक उसे अर्जेस्ट करने में अपनी सारी ताकत धीरे-धीरे खत्म कर रहा था अगर मेंढक उसी समय उस जार से कूद जाता तो आज वह जिंदा होता।

परिस्थिति से समझौता Moral Storie से हमें क्या सीखने को मिला

इस Moral Storie से हमें सीखने को मिला कि हमें परिस्थितियों का समझौता करते हुए निरंतर आगे बढ़ते रहना चाहिए और हमें जीवन में कंफर्ट जोन में जाकर कभी नहीं रहना चाहिए अगर हमें जीवन में कुछ पाना है तो हमें परिस्थितियों से लड़ना पड़ेगा।

 8. आंख खोल देने वाला – Moral Stories In Hindi

Moral Stories In Hindi

एक शहर में बहुत धनी व्यक्ति रहा करते थे जिसके पास बेशुमार दौलत था। लेकिन धनि व्यक्ति को एक बीमारी थी। वह बीमारी इस प्रकार की थी कि वह धनी व्यक्ति को लाल रंग नहीं दिखता था तो उन्होंने यह बीमारी को ठीक कराने के लिए बड़े-बड़े डॉक्टरों से सलाह ली एवं इलाज करवाएं। डॉक्टरों ने अमीर व्यक्ति को बताया कि आपके आंखों को एक खास प्रकार की बीमारी है अगर आप यह बीमारी को ठीक करना चाहते हैं

तो आपको कुछ समय सिर्फ और सिर्फ लाल रंग को ही देखना होगा ताकि आपके आंखों में लाल रंग को पहचानने की क्षमता बढ़ जाए। उस धनी व्यक्ति के पास बहुत सारा पैसा था इसलिए उसने शहर के जाने-माने पेंटरो को बुलाया और उसने कहा कि आज से मेरी सारी चीजें तुम लाल रंग की कर दो और पेंटरो ने ऐसा ही किया।

अब सारे पेंटर मिलकर एक – एक करके उस धनी व्यक्ति की सारी चीजें लाल कलर की करते चले गए सबसे पहले उन्होंने उसका घर लाल किया उसके बाद सारी चीजें लाल कलर की लेकिन फिर भी बात नहीं बनी कुछ ना कुछ चीजें छूट ही जाती थीऔर लाल रंग होने से वह व्यक्ति देख लेता था और उसे फिर से लाल कलर करवा देता था।

फिर क्या हुआ

धीरे-धीरे ऐसा करते – करते उस धनि व्यक्ति ने अपने बहुत सारे पैसे लाल कलर करवाने के चक्कर में खर्च कर दिए थे और रोजाना कुछ ना कुछ कलर करवा रहते थे यह करवाते करवाते व्यक्ति ने अपने बहुत सारे धन खर्च कर दिए तभी उस धनी व्यक्ति के घर के पास एक बुद्धिमान लड़का रहता था। उसने देखा कि उस धनी व्यक्ति के सारे चीजें लाल रंग की कर रखी है उसमें इस बात का कारण जानने की कोशिश की तो उसे पता चला कि वह धनी व्यक्ति लाल रंग को नहीं देख पता इसलिए अपनी सारी चीजों में लाल रंग करवा के अपनी आखो की छमता बढ़ाना चाहता है।

वह लड़का उस धनी व्यक्ति से जाकर मिला और उसने कहा कि आपको शांत दिमाग से सोचना चाहिए क्या इतना पैसा खर्चा करना उचित है उस लड़के ने कहा धनी व्यक्ति कहने लगा बेटा फिर मैं क्या करूं मुझे लाल कलर की पहचान करनी है इसलिए मुझे सारी चीजें लाल करवानी है ताकि मैं अपनी आंखों की छमता बढ़ा सकू।

उस लड़के ने कहा कई बार चीजें बहुत आसान होती है और हमारे आसपास उसका समाधान होता है लेकिन हम पहचान नहीं पाते और उस लड़के ने कहा अगर अपनी सारी चीजें लाल कलर की देखना चाहते हैं तो आप अपनी सारी चीजों को लाल कलर मत करवाइए और लाल कलर के चश्मे पहन लीजिए जिससे आपको सारी चीजें लाल कलर की दिखाई देगी और यह बहुत ही सस्ता उपाय है।

आपको इतने ज्यादा पैसे खर्च करने की भी जरूरत नहीं है। धनी व्यक्ति के पैरों तले जमीन खिसक गए और वह सोचने लगा कि अगर यह इतना आसान तरीका है अगर पहले मिला होता तो आज मेरे कितने सारे पैसे बच जाते। 

आंख खोल देने वाला Moral Storie से हमें क्या सीखने को मिला

इस short storie से हमें यह सीखने को मिला कि कुछ चीजों का समाधान हमारे आसपास ही होता है लेकिन हम उस चीज की समाधान ढूंढने के लिए इधर-उधर भटकते रहते हैं। इसलिए हमें किसी चीज का समाधान खोजने के लिए शांत दिमाग से सोचने की जरूरत होती है।

Final Words:-

दोस्तो आपको यह जीवन बदलने वाली कहानियां हिंदी में कैसा लगा कमेंट बॉक्स पर जरूर बताये और अपने विचार शेयर करें। साथ ही अपना कीमती समय देने के लिए आपका धन्यवाद।

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