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शनि चालीसा: Shani Chalisa, Aarti, Path, Mantra, Lyrics, Benefits in Hindi

Shani Chalisa Lyrics in Hindi

महिमा शनि देव की जब होती है। रंक को राजा करने मे वक़्त की गति भी बढ़ती है।।

हमारा भारतवर्ष ना केवल त्यौहारों का भारतवर्ष है बल्कि असंख्य देवी-देवताओँ और उनके आर्शीवादों का भी भारतवर्ष है जहां पर सप्ताह के सातों दिन किसी ना किसी देवी-देवता को समर्पित होते है और इसी संस्कृति व सभ्यता के अनुसार शनिवार का दिन दयालु से भी दयालु और कठोर से भी कठोर देवता अर्थात् शनि महाराज का दिन होता है जिस दिन लोग उनका आर्शीवाद पाने और शनि देव की कु-दृष्टि से बचने के लिए लोग उनकी वंदना, आराधना करने के साथ ही साथ उनकी मूर्ति का सरसों के तेल से अभिषेक करत है।

ये तो आप सभी जानते ही है कि, शनि देव अपनी क्रूरता के लिए कितने प्रसिद्ध हैं लेकिन बहुत कम लोगों को पता होगा कि, शनि देव की कृपा व दयालुता की कोई सीमा या थाह नहीं है क्योंकि जब वे किसी से प्रशन्न हो जाते है तो समझ लीजिए वो रंक से राजा बन जाता है लेकिन यदि वे किसी से रुष्ट हो जाते है तो समझ लीजिए उसे शनि देव की कु-दृष्टि से कोई नहीं बचा सकता है केवल खुद शनि देव के।

शनि देव के नाम से प्रसिद्ध शनिवार का दिन, विशेष तौर पर शनि देव का दिन कहा जाता है जिस दिन शनि देव की वंदना, आराधना व शनि चालीसा का पाठ करने वाले भक्तजनों को सुख-शांति, समृद्धि, धन, विवेक और संतोष की प्राप्ति होती है जिससे ना केवल आपके परिवार में, सुख – शांति का प्रवेश होता है बल्कि आपके व आपके पूरे परिवार को नई सकारात्मक ऊर्जा की प्राप्ति होती है।

अन्त, इसी लक्ष्य से हम अपने इस आर्टिकल में, अपने सभी भक्तजनों को शनि देव की महिमा का बखान करने के लिए आप सभी को शनि चालीसा पाठ की सौगात देंगे ताकि भी प्रति शनिवार को शनि चालीसा का पाठ करके ना केवल शनि देव की कृपा और महिमा का लाभ प्राप्त कर सकें बल्कि अपने साथ-साथ अपने परिवार को भी शनि देव के आर्शीवाद से सुखी व सम्पन्न बना सकें और यही हमारे इस आर्टिकल का लक्ष्य है।

Shani Chalisa Benefits: शनि चालीसा के फायदें

शनि देव की कृपा से दिन और रात के सहारा है।
उन्ही का न्याय है जिसकी वजह से गरीब को भी मिला ज़िन्दगी का किनारा है।।

  1. शनि चालीसा का प्रति शनिवार पाठ करने से भक्तजनों को अपना सुख-शांति, समृद्धि और धन की प्राप्ति होती है,
  2. शनि चालीसा के नियमित पाठ से आपके घर के भीतर सभी नकारात्मक ऊर्जाओं का सर्वनाश हो जाता है और आपके घर में, सर्वत्र सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है,
  3. शनि चालीसा के पाठ से आप पर शनि देव की विशेष कृपा होती है जिससे ना केवल आपको सुख-शांति व धन की प्राप्ति होती है बल्कि साथ ही साथ आपको आपके सभी कार्यो में, सफलता की प्राप्ति होती है,
  4. शनिवार का दिन, भगवान शनि देव को समर्पित होता है जिस पर शनि चालीसा का पाठ करने से शनि देव विशेष तौर प्रशन्न होते है और
  5. शनि चालीसा के पाठ से ना केवल आपको धन-सम्पत्ति की प्राप्ति होती है बल्कि आपका व आपके पूरे परिवार का सतत व सर्वांगिन विकास होता है।

शनि चालीसा का महत्व क्या है?

  • शनि चालीसा के पाठ से असीम सुख व शांति की प्राप्ति होती है

शनि भक्तो का कहना है कि, उन्हें नियमित तौर पर शनि चालीसा के पाठ करने से असीम सुख व शांति की प्राप्ति होती है जिससे ना केवल उनके घरो में, खुशहाली का माहौल बनता है बल्कि साथ ही साथ सम्पूर्ण परिवार के उज्जवल भविष्य का निर्माण भी होता है।

  • शनि चालीसा से मिलती है शनि देव की कृपा

शनि देव, देवों के देव है जिनकी कृपा से इंसान, रंक से राजा और राजा से रंक बन जाता है अर्थात् शनि देव अपने जिस भक्त पर प्रशन्न होते है उसे पूरी तरह से धन-धान्य से समृद्ध कर देते है जबकि जिस पर रुष्ट होते है उन्हें रंग से भी बदतर स्थिति में, पहुंचा देते है।

इसीलिए शनि चालीसा के नियमित पाठ करने से हमें व हमारे सभी शनि भक्तों को शनि देव की कृपा प्राप्त होती है और हमारा चहुमुखी विकास होता है इसीलिए हमें, नियमित तौर पर शनि देव की वंदना व आराधना हेतु शनि चालीसा का पठन-पाठन करना चाहिए।

  • शनि मंत्र से आप जगा सकते है अपने सोये भाग्य

जी हां, आप बिलकुल सही पढ़ रहे हैं कि, हमारे सभी शनि भक्त, नियमित रुप से शनि मंत्र का जाप करके अपने सोये भाग्य को जगा सकते है।

देवों के देव श्री. शनि देव का पवित्र मंत्र इस प्रकार से हैं – “ऊं प्रां प्रीं प्रौं स: शनिश्र्शराय नम:”

हमारे सभी शनि भक्त यदि उपरोक्त शनि मंत्र का जाप लगातार 40 दिन 19,000 बार जाप करते हैं तो ना केवल उनके सोय भाग्य जागते है बल्कि साथ ही साथ सभी शनि भक्तो को साढ़े साती जैसी शनि महादशा में, भी बेहद लाभ प्राप्त होता है।

  • शनि ग्रह से मुक्ति दिलाती है शनि चालीसा

भारतीय ज्योतिष शास्त्र की मानें तो कई बार हमारे गलत कार्यों या फिर किसी भी प्रकार से शनि देव को ठेस पहुंचाने पर हमारे ग्रहों पर शनि देव की कु-दृष्टि पड़ जाती है जिससे ना तो हमारा विकास होता है बल्कि हमारे द्धारा किये जाने वाले सभी कार्यो में हमें, केवल नुकसान और क्षति ही उठानी पड़ती है लेकिन नियमित रुप से शनि चालीसा के पठन-पाठन से आपको शनि ग्रह से मुक्ति मिलती है और आपके सभी बिगड़े काम बनने लगते है और इस प्रकार आप भी शनि देव की महिमा बरसनी शुरु हो जाती है।

  • शनि चालीस से मिटते है जीवन के सभी कष्ट

शनि देव की महिमा व कृपा अपरम्पार है जिसका बखान ज्योतिष शास्त्र में, बेहद आकर्षक ढंग से किया गया है क्योंकि ज्योतिष शास्त्र के अनुसार जो इंसान / मानव अपने जीवन में, अच्छे कार्य करता है और नियमित रुप से शनि देव का पाठ करता है उसे जीवन में, कभी कोई कष्ट नहीं झेलना पड़ता है।

यहां तक कि, इस प्रकार के इंसान को शनि साढ़ेसाती, ढैया व शनि महादशा के दौरान भी किसी भी प्रकार की समस्या या प्रकोप का सामना नहीं करना पड़ता है।

  • शनिवार व मंगलवार को शनि चालीसा के पाठ से होती है अत्यधिक लाभ की प्राप्ति

हम, अपने सभी शनि भक्तो को विशेष तौर पर बताना चाहते है कि, वैसे तो आप शनि देव की वंदना व आराधना सप्ताह के सातों दिन कर सकते है लेकिन यदि आपको शनि देव की विशेष कृपा और आर्शीवाद चाहिए तो आपको इन बातों का अपनाना होगा जैसे कि:-

  • नियमित रुप से प्रति शनिवार व मंगलवाल को शनि चालीसा का पाठ करें,
  • प्रति शनिवार व मंगलवाल को शाम 5 बजे के बाद शनि चालीना का पाठ करें,
  • हर शनिवार व मंगलवाल को शाम 5 बजे के बाद किसी भी शनि मंदिर, हनुमान मंदिर या फिर पीपल के वृक्ष की शीतल छाया में, बैठकर शनि चालीसा का पाठ करें,
  • यदि आपके पास शनि चालीसा का पाठ करते समय कुछ ना हो तो कोई बात नहीं बस सरसों के तेल का दीपक जलाकर भी आप शनि चालीसा का पाठ कर सकते है जिससे आपको विशेष तौर पर शनि देव की महिमा व कृपा की प्राप्ति होगी आदि।

Shani Chalisa in Hindi: शनि चालीसा का पूरा पाठ हिंदी में

।। दोहा ।।

जय गणेश गिरिजा सुवन, मंगल करण कृपाल।

दीनन के दुख दूर करि, कीजै नाथ निहाल।।

जय जय श्री शनिदेव प्रभु, सुनहु विनय महाराज।

करहु कृपा हे रवि तनय, राखहु जन की लाज।।

।। चौपाई ।।

जयति जयति शनिदेव दयाला। करत सदा भक्तन प्रतिपाला।।

चारि भुजा, तनु श्याम विराजै। माथे रतन मुकुट छबि छाजै।।

परम विशाल मनोहर भाला। टेढ़ी दृष्टि भृकुटि विकराला।।

कुण्डल श्रवण चमाचम चमके। हिय माल मुक्तन मणि दमके।।

कर में गदा त्रिशूल कुठारा। पल बिच करैं अरिहिं संहारा।।

पिंगल, कृष्णो, छाया नन्दन। यम, कोणस्थ, रौद्र, दुखभंजन।।

सौरी, मन्द, शनी, दश नामा। भानु पुत्र पूजहिं सब कामा।।

जा पर प्रभु प्रसन्न ह्वैं जाहीं। रंकहुँ राव करैं क्षण माहीं।।

पर्वतहू तृण होई निहारत। तृणहू को पर्वत करि डारत।।

राज मिलत बन रामहिं दीन्हयो। कैकेइहुँ की मति हरि लीन्हयो।।

बनहूँ में मृग कपट दिखाई। मातु जानकी गई चुराई।।

लखनहिं शक्ति विकल करिडारा। मचिगा दल में हाहाकारा।।

रावण की गति-मति बौराई। रामचन्द्र सों बैर बढ़ाई।।

दियो कीट करि कंचन लंका। बजि बजरंग बीर की डंका।।

नृप विक्रम पर तुहि पगु धारा। चित्र मयूर निगलि गै हारा।।

हार नौलखा लाग्यो चोरी। हाथ पैर डरवायो तोरी।।

भारी दशा निकृष्ट दिखायो। तेलिहिं घर कोल्हू चलवायो।।

विनय राग दीपक महं कीन्हयों। तब प्रसन्न प्रभु ह्वै सुख दीन्हयों।।

हरिश्चन्द्र नृप नारि बिकानी। आपहुं भरे डोम घर पानी।।

तैसे नल पर दशा सिरानी। भूंजी-मीन कूद गई पानी।।

श्री शंकरहिं गह्यो जब जाई। पारवती को सती कराई।।

तनिक विलोकत ही करि रीसा। नभ उड़ि गयो गौरिसुत सीसा।।

पाण्डव पर भै दशा तुम्हारी। बची द्रौपदी होति उघारी।।

कौरव के भी गति मति मारयो। युद्ध महाभारत करि डारयो।।

रवि कहँ मुख महँ धरि तत्काला। लेकर कूदि परयो पाताला।।

शेष देव-लखि विनती लाई। रवि को मुख ते दियो छुड़ाई।।

वाहन प्रभु के सात सुजाना। जग दिग्गज गर्दभ मृग स्वाना।।

जम्बुक सिंह आदि नख धारी। सो फल ज्योतिष कहत पुकारी।।

गज वाहन लक्ष्मी गृह आवैं। हय ते सुख सम्पति उपजावैं।।

गर्दभ हानि करै बहु काजा। सिंह सिद्धकर राज समाजा।।

जम्बुक बुद्धि नष्ट कर डारै। मृग दे कष्ट प्राण संहारै।।

जब आवहिं प्रभु स्वान सवारी। चोरी आदि होय डर भारी।।

तैसहि चारि चरण यह नामा। स्वर्ण लौह चाँदी अरु तामा।।

लौह चरण पर जब प्रभु आवैं। धन जन सम्पत्ति नष्ट करावैं।।

समता ताम्र रजत शुभकारी। स्वर्ण सर्व सर्व सुख मंगल भारी।।

जो यह शनि चरित्र नित गावै। कबहुं न दशा निकृष्ट सतावै।।

अद्भुत नाथ दिखावैं लीला। करैं शत्रु के नशि बलि ढीला।।

जो पण्डित सुयोग्य बुलवाई। विधिवत शनि ग्रह शांति कराई।।

पीपल जल शनि दिवस चढ़ावत। दीप दान दै बहु सुख पावत।।

कहत राम सुन्दर प्रभु दासा। शनि सुमिरत सुख होत प्रकाशा।।

।। दोहा ।।

पाठ शनिश्चर देव को, की हों भक्ततैयार।

करत पाठ चालीस दिन, हो भवसागर पार।।

 

Shani Chalisa Lyrics in Hindi

।। Doha ।।

Jai Ganesh Girija Suwan, Mangal Karan Krapal
Deenan Ke Dhuk Dhoor Kari,Kheejain Nath Nihal ।।
Jai Jai Shri Shanidev Prabhu,Sunahu Vinay Maharaj
Karahu Krapa Hey Ravi Tanay,Rakhahu Jan Ki Laaj ।।

Jayati Jayati Shanidev Dayala
Karat Sada Bhaktan Pratipala ।।

।। Chaupai ।।

Chari Bhuja, Tanu Shyam Virajai
Mathey Ratan Mukut Chavi Chajai ।।

Param Vishal Manohar Bhala
Tedi Dhrishti Bhrukuti Vikrala ।।

Kundal Shravan Chamacham Chamke
Hiy Mal Muktan Mani Dhamke ।।

Kar Me Gada Trishul Kutara
Pal Bich Karai Arihi Samhara ।।

Pinghal, Krishno, Chaya, Nandan
Yum, Konasth, Raudra, Dhukbhanjan ।।

Sauri, Mandh Shani, Dash Nama
Bhanu Putra Poojhin Sab Kama ।।

Ja par Prabu Prasann Havain Jhahin
Rankahun Raav Karain Shan Mahin ।।

Parvatahu Tran Hoi Niharat
Tranhu Ko Parvat Kari Darat ।।

Raj Milat Ban Ramhin Dinhyo
Kaikeyihu Ki Mati Hari Linhiyo ।।

Banhun Main Mrag Kapat Dhikayi
Matu Janki Gayi Churayi ।।

Lakhanhin Shakti Vikal Karidara
Machiga Dal Main Hahakara ।।

Ravan Ki GatiMati Baurayi
Ramchandra Saun Bair Badhayi ।।

Dhiyo Keet Kari Kanchan Lanka
Baji Bajarang Beer Ki Danka ।।

Nrap Vikram Par Tuhin Pagu Dhara
Chitra Mayur Nigali Gai Hara ।।

Har Naulakkha Lagyo Chori
Hath Pair Darvay Tori ।।

Bhari Dhasha Nikrasht Dhikayo
Telihin Ghar Kolhu Chalvayo ।।

Vinay Rag Dheepak Mah Khinhyo
Tab Prasann Prabhu Hvai Sukh Dhinhayo ।।

Harishchandra Nrap Naari Bikani
Apahun Bhare Dom Gar Pani ।।

Taise Nal Par Dasha Sirani
BhunjiMin Kood Gayi Pani ।।

Sri Shankarhin Gahyo Jab Jayi
Parvati Ko Sati Karayi ।।

Tanik Vilokat Hi Kari Risa
Nabh Udi Gayo Gaurisut Sisa ।।

Pandav Par Bhai Dasha Thumhari
Bachi Draupadi Hoti Udhari ।।

Kaurav Ke Bhi Gati Mati Maryo
Yuddh Mahabharat Kari Daryo ।।

Ravi Kahn Mukh Mahn Dhari Tatkala
Lekar Koodi Paryo Patala ।।

Shesh DevLakhi Vinti Layi
Ravi Ko Mukh Tai Dhiyo Chudayi ।।

Vahan Prabhu Ke Sat Sujana
Jag Diggaj Gardhabh Mrag Swana ।।

Jambuk Sinh Aadi Nakh Dhari
So Phal Jyotish Kahat Pukari ।।

Gaj Vahan Lakshmi Grah Aavain
Hay Te Sukh Sampati Upjavain ।।

Gadarbh Hani Karai Bahu Kaja
Sinh Sidhkar Raj Samaja ।।

Jambuk Buddhi Nasht Kar Darai
Mrag De Kasht Pran Sanharai ।।

Jab Aavahi Prabu Swan Savari
Chori Aadi Hoy Dar Bhari ।।

Taisahi Chari Charan Yah Nama
Swarn Lauh Chandi Aru Tama ।।

Lauh Charan Par Jab Prabu Aavain
Dhan Jan Sampati Nasht Karavain ।।

Samata Tamra Rajat Shubhkari
Swarn Sarv Sarv Sukh Mangal Bhari ।।

Jo Yah Shani Charitra Nit Gavai
Kabahun Na Dasha Nikrasht Satavai ।।

Adbhut Nath Dhikhavain Leela
Karain Shatru Ke Nashi Bali Deela ।।

Jo Pandit Suyogya Bulvayi
Vidhvat Shani Grah Shanti Karayi ।।

Peepal Jal Shani Diwas Chadhavat
Deep Daan Dai Bahu Sukh Pawat ।।

Kahat Ram Sundar Prabu Dasa
Shani Sumirat Sukh Hot Prakasha ।।

।। Doha ।।

Path Shanishchar Dev Ko, Ki Hon Bhakt Taiyar
Karat Path Chalis Din,Ho Bhavasagar Paar ।।

“तेरी भक्ति से मिलता है आत्मा को आराम। आपकी कृपा से रंक भी जाये राजा समान।।”

शनि देव, देवों के देव कहलाते है जो एक बार प्रशन्न हो जाये तो रंग को राजा बनाकर ही छोड़ते है और यदि गलती से भी एक बार रुष्ट हो जायें तो राजा को रंक से भी बदतर स्थिति में, लगाकर ही छोड़ते है इसलिए हम, कह सकते है कि, शनि देव दयालु से भी दयालु है और कठोर से भी कठोर है लेकिन हमारे भक्तजन आसानी से शनि देव को मना सकते है अर्थात् प्रशन्न कर सकते है।

शनि देव की महिमा व कृपा पाने के लिए हमारे सभी शनि भक्तों को नियमित रुप से शनिवार व मंगलवार के दिन शाम के 5 बजें के बाद Shani Chalisa शनि चालीसा का पाठ करना चाहिए जिससे ना केवल आपके धन-धान्य की बल्कि अपार वैभव की भी प्राप्ति होती है व साथ ही साथ हमारे सभी शनि भक्तो को विस्तृत ढंग से शनि की कृपा प्राप्त होती है जिससे हमारे व हमारे पूरे परिवार का सुखमय विकास होता है और इसीलिए हमें, निमयित रुप से शनि चालीसा का पठन-पाठन करना चाहिए।

अन्त हम, आशा करते है कि, आप सभी को Shani Chalisa शनि चालीसा पर आधारित हमारा ये आर्टिकल पसंद आया होगा व आर्टिकल में दी गई जानकारी आपके लिए मददगार साबित हुई होगी जिसके लिए आप ना केवल हमारे इस आर्टिकल को लाइक करेंगे,शेयर करेंगे बल्कि साथ ही साथ अपने विचार व सुझाव भी हमें, कमेंट करके बतायेंगे ताकि हम, इसी तरह के आर्टिकल आपके लिए लाते रहें।

 

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