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Sachin Tendulkar Biography In Hindi: सचिन तेंदुलकर का जीवन परिचय

Sachin Tendulkar Biography In Hindi

हमारे देश भारत जहा क्रिकेट को एक खेल नही बल्कि एक धर्म की तरह समझा जाता है और वही यदि हम बात करे इस खेल को खेलने वाले क्रिकेटरों की तब इन क्रिकेटरों को हमारे देश के लोगो द्वारा पूजा जाता है। क्योकि पूरी दुनिया में भारत ही एकमात्र ऐसा देश है जहा क्रिकेट प्रेमियों संख्या सबसे अधिक है। यही नही आपको आश्चर्य तो तब होगा जब आपको पता लगेगा की हमारे देश भारत में वर्तमान में हर तीसरा बच्चा बड़ा होकर क्रिकेटर बनाना चाहता है। बने भी क्यों न क्योकि एक ओर इस खेल को लोगो द्वारा खूब प्यार और सपोर्ट भी मिलता है।

वही दूसरी ओर इस खेल में एक बार अच्छा करियर बन जाने के बाद पैसा और प्रसिद्धि भी बहुत अधिक मात्रा में मिलती है। लेकिन करोडो लोगो द्वारा खेले तथा पसंद किये जाने वाले क्रिकेट के खेल में एक सफल क्रिकेटर केवल वही व्यक्ति बन पाता है।  जिसमे एक अच्छा और सफल क्रिकेटर बनने की काबिलियत होती है।

क्रिकेट जगत में केवल उसी खिलाडी का नाम होता जो खेल के प्रति अपनी शारीरिक और मानसिक सीमाओं को पार करते हुए कड़ी मेहनत करता है। आज हम एक ऐसे ही क्रिकेटर के जीवन के बारे में जानने वाले है। जिन्हें पूरी दुनिया में क्रिकेट का भगवान् कहा जाता है और जिनको हमारे देश में भगवान् की तरह पूजा जाता है।

जी हां !! हम बात कर रहे है क्रिकेट के भगवान् कहे जाने वाले सचिन तेंदुलकर के बारे में। जिन्होंने क्रिकेट के खेल में कड़ी मेहनत और क्रिकेट के प्रति जूनून के दम पर ही यह स्थान हासिल किया है। आप सचिन तेंदुलकर की प्रसिद्धि और उनके खेल का नदाजा इसी बात से लगा सकते है। की जब वह किसी मैच में आउट हो जाते थे, तब लगभग पूरे भारत में उस मैच को देखने वाले आधे लोग अपनी टीवी को बंद कर दिया करते थे।

1 Name Sachin Ramesh Tendulkar
2 Age 47 Years, ( 24 April 1973 ), Mumbai.
3 Education Indian Education Society’s New English School in Bandra (East), Mumbai • Shardashram Vidyamandir School, Dadar, Mumbai
4 Profession  Indian Former International Cricketer
5 NetWorth 1090 Crore INR
6 Father / Mother Ramesh Tendulkar / Rajni Tendulkar
7 Family Wife: Anjali Tendulkar, Childern: Arjun Tendulkar, Sara Tendulkar
8 Known As God of Cricket, Little Master, Master Blaster
9 Religion Saraswat Brahmin 
10 Nationality Indian

इसीलिए यदि हम सचिन तेंदुलकर को क्रिकेट के भगवान् का दर्जा दे तब किसी को कोई भी आश्चर्य नही होगा। क्रिकेट जगत में उनकी सफलता और उनके खेल का बेहतरीन अंदाजा हम इसी बात से लगा सकते है। की मास्टर ब्लास्टर सचिन तेंदुलकर ही वह एकमात्र खिलाडी है, जिन्हें भारत के सर्वोच्च नागरिक सम्मान भारत रत्न से सम्मानित किया गया है। आज के इस बेहतरीन आर्टिकल में Sachin Tendulkar Biography In Hindi तथा सचिन तेंदुलकर का जीवन परिचय को जानेंगे।

Sachin Tendulkar का बचपन:

क्रिकेट के भगवान कहे जाने वाले मास्टर ब्लास्टर सचिन तेंदुलकर, जो की आज भारत के करोडो क्रिकेट प्रेमियों के दिलो पर राज करते है। लिटिल मास्टर सचिन तेंदुलकर का जन्म 24 अप्रैल, 1973 को राजपुर नामक जगह पर हुआ था। सचिन तेंदुलकर का परिवार एक माध्यम वर्गीय तथा एक मराठी परिवार था। सचिन तेंदुलकर के बचपन का नाम सचिन रमेश तेंदुलकर है। सचिन तेंदुलकर जैसे महान खिलाडी के जन्म देने वाले क्रिकेट के भगवान् मास्टर ब्लास्टर के पिता का नाम रमेश तेंदुलकर था।

सचिन के पिता पेशे से एक लेखक और प्रोफ़ेसर थे। सचिन की माँ का नाम रजनी तेंदुलकर था। सचिन की माँ रजनी तेंदुलकर इंशोरेंस कंपनी में काम करती थी।  सचिन अपने पिता रमेश तेंदुलकर की दूसरी पत्नी के बेटे है। सचिन के पिता रमेश तेंदुलकर ने उनका नाम सचिन अपने पसंदीदा संगीतकार सचिन देव बर्मन से प्रेरित होकर रखा था। सचिन तेंदुलकर लिटिल मास्टर अपने बचपन से ही पढाई के मुकाबले खेलो और खासकर क्रिकेट के खेल में बहुत रूचि रखते थे।  लिटिल मास्टर ब्लास्टर बचपन में से ही बहुत अधिक शरारती बच्चे थे।

Sachin Tendulkar की क्रिकेट में रूचि:

चलिए अब हम जानते है, की किस तरह और कब से सचिन तेंदुलकर ने अपने बचपन के क्रिकेट के शौक को प्रोफेशनल तरीके से खेलना शुरू किया था। बात इस प्रकार से है की सचिन बचपन से ही बहुत अधिक शरारती बच्चे थे। उनकी इन्ही शरारतो के वजह से उनकी स्कूल में अक्सर ही उनका झगडा दुसरे बच्चो के साथ हो जाया करता था।  इसी बात को देखते हुए और सचिन की शरारतो को कम करने के लिए।

सचिन तेंदुलकर के पिता रमेश तेंदुलकर की पहली पत्नी के बड़े बेटे तथा सचिन के बड़े भाई अजितं ने सचिन को साल 1984 में उनकी क्रिकेट के प्रति रूचि को देखते हुए, क्रिकेट एकेडमी ज्वाइन कराने का सोचा। इसके बाद सचिन के बड़े भाई अजित उन्हें रमाकांत आचरेकर के पास लेकर गये थे। उस समय रमाकांत आचरेकर क्रिकेट जगत के प्रसिध्द कोच के रूप में जाने जाते थे।  चलिए अब हम जानते है की आगे क्रिकेट एकेडमी में जाने के बाद सचिन का आगे का जीवन संघर्षपूर्ण जीवन किस तरह से व्यतीत हुआ था।

Sachin Tendulkar का संघर्ष भरा शुरुआती जीवन:

चूँकि सचिन की क्रिकेट के प्रति गहरी रूचि को देखते हुए और सचिन की शरारतो पर लगाम लगाने के लिए सचिन के भाई अजित सचिन को रमाकांत आचरेकर के पास लेकर गये थे। दुर्भाग्य से सचिन ने उनके कोच रमाकांत आचरेकर के सामने पहली बार प्रदर्शन किया। तब सचिन के कोच रमाकांत को उनका प्रदर्शन कुछ ख़ास अच्छा और प्रभावी नही लगा था। सचिन के कोच रमाकांत आचरेकर ने सचिन के प्रदर्शन को देखते हुए उनके क्रिकेट की कोचिंग देने से मना कर दिया था। लेकिन सचिन के बड़े भाई अजित के बार बार रिक्वेस्ट करने रमाकांत आचरेकर सचिन के खेल दोबारा देखने के लिए तैयार हो गये थे।  इसके बाद उनके कोच आचरेकर ने पुनः सचिन का मैच देखा। लेकिन इसबार सचिन के कोच रमाकांत ने उनका यह मैच एक पेड़ के पीछे से छुपकर देखा था।

यह सचिन के खेल और उनकी विलक्षण प्रतिभा का ही कमाल था। उन्होंने अपने दुसरे मैच में बहुत बेहतरीन प्रदर्शन किया था।  इसके बाद उनके कोच ने यह समझ लिया था, की सचिन केवल हमारे सामने खेलने में ही थोडा सा असहज महसूस कर रहे थे। इसके बाद रमाकांत आचरेकर ने सचिन को अपनी क्रिकेट एकेडमी में दाखिला दे दिया और वह सचिन को क्रिकेट के बारीक़ से बारीक गुर सिखाने लगे थे।  चूँकि अब सचिन रोजाना ही अपने कोच रमाकांत से क्रिकेट की बारीकिया सेख रहे थे। सचिन के कोच रमाकांत आचरेकर भी सचिन के खेल से बहुत प्रभावित थे।  इसीलिए उन्होंने सचिन को श्रद्धाआश्रम विद्या मंदिर में पढाई करने के लिए जाने को कहा।  क्योकि यहा पर क्रिकेट की अच्छी टीम थी और क्रिकेट के लिए बेहतरीन माहौल भी था।

इस बाद सचिन ने अपने कोच की बात मानते हुए, कोच द्वारा बताये गये स्कूल में ही दाखिला ले लिया था।  यहा पढाई के साथ साथ उनकी स्कूल की प्रोफेशनल टीम के साथ क्रिकेट भी खेलने लगे थे। उस समय आज एक प्रसिद्द मुंबई के शिवाजी पार्क में क्रिकेट खेलते थे और शिवाजी पार्क में ही सचिन अपने कोच रमाकांत आचरेकर की देखरेख में क्रिकेट खेलते थे।  उस समय के एक बेहतरीन घटना यह थी, की सचिन के कोच उन स्टंप्स पर सिक्का रख दिया करते थे और सचिन को बोलिंग कर रहे बोलरो से कहते थे।  की यदि उन्होंने सचिन को आउट कर दिया तो स्टंप पर रखा हुआ सिक्का उनका होगा।  लेकिन सचिन में बचपन से ही क्रिकेट के प्रति बेहतरीन जूनून था। वह किसी से भी आउट ही नही होते थे , सचिन तेंदुलकर के पास आज भी उन सिक्को में से 13 सिक्के संभल कर रखे हुए है और सचिन आज भी उन सिक्को को उनकी सबसे बड़ी सफलता मानते है।

Sachin Tendulkar की क्रिकेट में सफलता:

सचिन शुरुआत से ही क्रिकेट के प्रति पूरी तरह से समर्पित थे। कोच रमाकांत आचरेकर की देखरेख में खेलते और क्रिकेट सीखते हुए सचिन का खेल दिन प्रतिदिन बेहतर होता जा रहा था।  सचिन भी दिन प्रतिदिन क्रिकेट को पूरी लगन से खेलते और क्रिकेट की बारीकियो की बड़े ही ध्यान से सीखते थे। यह उनकी कड़ी मेहनत का ही नतीजा था।  की वह आसपास के लोगो के लिए उनके खेल को लेकर चर्चा का विषय बन रहे थे।

सचिन शुरुआत में अपनी स्कूल की क्रिकेट टीम तथा आसपास के अन्य क्लबो के लिए क्रिकेट के मैच खेला करते थे। आपको यह जानकर हैरानी होगी की शुरू शुरू में सचिन को क्रिकेट में बोलिंग करने का भी बहुत शौक था , इसके लिए सचिन विशेष रूप से मद्रास के एम्. आर .ऍफ़. क्रिकेट फाउंडेशन में बोलिंग सीखने के लिए गये थे, इस जगह आस्ट्रेलिया तेज गेंदबाज डेनिस लिली ट्रेनिंग देते थे।

उन्होंने सचिन का खेल देखा और उन्हें बोलिंग की जगह बेटिंग करने की सलाह दी थी।  इसके बाद सचिन ने उनकी बात मानते हुए बैटिंग की ओर अधिक ध्यान दिया, कुछ महीनो के बाद क्रिकेट में अपनी बैटिंग को बेहतर करते हुए अपने खेल को बहुत बेहतर कर लिया था।  उस समय किसी एक अच्छे खिलाडी को Best Junior Cricket Award मिलने वाला था, सचिन इस अवार्ड के बहुत प्रबल दावेदार थे। लेकिन दुर्भाग्य से सचिन को यह अवार्ड नही मिला था, जिससे वह बहुत निराश भी हुए थे। इसके बाद सचिन के मनोबल को बढाने के लिए उस समय के भारतीय बल्लेबाज सुनील गावस्कर ने सचिन को अपने क्रिकेट पैड की जोड़ी दी थी।

  • सचिन तेंदुलकर अपने क्रिकेट खेल को कड़ी मेहनत से प्रतिदिन बेहतर से बेहतर बनाते गये।  यह सचिन की कड़ी मेहनत का ही नतीजा था, की 14 नवम्बर साल 1987 को सचिन तेंदुलकर रणजी ट्राफी के लिए भारत के घरेलु फर्स्ट क्लास क्रिकेट टूर्नामेंट में मुंबई की ओर से खेलने के लिए सचिन को चुना गया था।  परन्तु यह सचिन का दुर्भाग्य ही था की उन्हें किसी भी मैच में अंतिम ग्यारह खिलाडियों में खेलने का मौका ही नही मिल पाया था। परन्तु सचिन का जूनून और इरादा बहुत ही पक्का था। उन्होंने शुरुआती असफलताओ के बाद भी हार नही मानी थी।

 

  • यह क्रिकेट के प्रति सचिन की सच्ची लगन का नतीजा ही था। की उन्हें एक साल बाद ही 11 दिसम्बर साल 1988 को मात्र 15 वर्ष और 232 दिन की उम्र में ही सचिन की मुंबई की ओर से खेलते हुए गुजरात के खिलाफ सचिन तेंदुलकर ने अपना डेब्यू किया था। इस मैच में उन्होंने सभी को दिखा दिया की वह किस दर्जे के खिलाडी है।  सचिन ने अपने पहले ही डेब्यू मैच में नाबाद शतक बनाया था। सचिन तेंदुलकर फर्स्ट क्लास मैच में शतक बनाने वाले सबसे युवा खिलाडी भी बने थे। इसके बाद सचिन पूरे सीजन में उस समय मुंबई के लिए सबसे अधिक रन बनाने वाले खिलाडी भी रहे थे।

 

  • इसके बाद भी सचिन की बेहतरीन फॉर्म लगातार जारी रही और सचिन तेंदुलकर ने इरानी ट्राफी में दिल्ली के खिलाफ खेलते हुए पहले ही मैच में शानदार नाबाद शतक लगाया था। इस समय सचिन शेष भारत के लिए क्रिकेट खेल रहे थे। सचिन तेंदुलकर के बेहतरीन खेल का अंदाजा आप इसी बता से लगा सकते है की उन्होंने इरानी ट्रॉफी, रणजी ट्रॉफी, और दुलीप ट्रॉफी में अपने पहले ही मैचो में शानदार शतक जमाया था।  ऐसा कारनामा करने वाले सचिन तेंदुलकर भारत के एकमात्र खिलाडी थे। सचिन का यह रिकॉर्ड आजतक कोई नही तोड़ पाया है।

 

  • सचिन तेंदुलकर की लगातार कड़ी मेहनत का ही नतीजा था। की उनके बेहतरीन प्रदर्शन को देखते हुए मात्र 16 वर्ष की उम्र में ही सचिन को भारतीय अंतराष्ट्रीय क्रिकेट टीम में खेलने के लिए चुना गया था।  भारतीय टीम के लिए इतनी कम उम्र में चुना जाना प्रत्येक क्रिकेट खिलाडी का सपना होता है। यह सचिन की कड़ी मेहनत और उनके बेहतरीन प्रदर्शन का ही नतीजा था। की उन्हें मात्र 16 वर्ष की उम्र में भारतीय क्रिकेट टीम में खेलने के लिए चुन लिया गया था।

 

  • सचिन तेंदुलकर ने अपने क्रिकेट करियर में टेस्ट क्रिकेट में डेब्यू मात्र 16 वर्ष और 205 दिन की उम्र में करांची में पाकिस्तान के खिलाफ खेलते हुए किया था।
  • इसके बाद सचिन तेंदुलकर ने भारतीय टीम के लिए खेलते हुए एकदिवसीय मैच में अपना डेब्यू 18 दिसंबर, 1989 को पाकिस्तान के खिलाफ खेलते हुए किया था।

Sachin Tendulkar का क्रिकेट का भगवान् बनना:

पकिस्तान के खिलाफ अपने डेब्यू मैच वाली सीरिज के ही एक मैच में खेलते हुए सचिन तेंदुलकर को एक पाकिस्तानी तेज गेंदबाज की एक तेज गेंद उनके नाक पर बहुत ही जोर से लगी और सचिन के नाक से लगातार खून बह रहा था। लेकिन क्रिकेट के प्रति सचिन का जूनून और भारत के लिए खेलने का पागलपन किसी से भी छिपा नही था।  एक तरह से कहा जाये तो खुद को सिद्ध करने के लिए और क्रिकेट के प्रति अपने जूनून को बनाये रखने के लिए उन्होंने नाक पर गेंद लगने के बावजूद उस मैच में खेलना बंद नही किया और पाकिस्तानी तेज गेंदबाजो का डटकर मुकाबला भी किया।

इस मैच में सचिन तेंदुलकर ने पकिस्तई गेंदबाजो की तेज गेंदों का सामना करते हुए 54 रन बनाये थे, यही से वह भारतीय क्रिकेट प्रेमियों की नजर में आ गये। सचिन ने इसके बाद भारत के लिए खेलते हुए सभी फोर्मेट्स को मिलाते हुआ शतको के शतक 100 शतक लगाने का कारनामा कर दिखाया , आजतक भारत के लिए खेलते हुए किसी भी खिलाडी ने 100 शतक नही लगाए है। सचिन क्रिकेट जगत में अपने बेहतरीन खेल दम पर करोडो क्रिकेट प्रेमियों के दिलो पर राज करते है। वर्तमाना समय में सचिन तेंदुलकर को क्रिकेट का भगवान् कहा जाता है।

Sachin Tendulkar का निजी जीवन:

चलिए अब हम सचिन तेंदुलकर के निजी जीवन के बारे में जानते है। सचिन तेंदुलकर ने 24 मई, साल 1995 के दिन डॉ. अंजलि मेहता से शादी की थी। सचिन और अंजलि मेहता सबसे पहली बार दोनो एक एयरपोर्ट पर मिले थे। उस वक्त अंजली को सचिन और क्रिकेट दोनों के बारे में कोई अधिक दिलचस्पी और जानकारी नही थी । सचिन और अंजलि के दो बच्चें है। सचिन तेंदुलकर की बड़ी बेटी सारा तेंदुलकर और सचिन तेंदुलकर का एक बेटा अर्जुन तेंदुलकर है।  जो की वर्तमान में अपने पिता की ही तरह एक सफल क्रिकेटर बनने की राह पर निरंतर अग्रसर है।

अवार्ड्स तथा मान सम्मान:

  • सचिन तेंदुलकर को भारत सरकार द्वारा 16 नवम्बर, साल 2014 को भारत के सर्वोच्च नागरिक सम्मान भारत रत्न से सम्मानित किया गया था, भारत रत्न पुरस्कार प्राप्त करने वाले सचिन तेंदुलकर पहले भारतीय खिलाडी है। 
  • सचिन तेंदुलकर को खेल के लिए दिया जाने वाला सर्वोच्च खेल पुरस्कार राजीव गांधी खेल रत्न पुरस्कार से सम्मानित किया गया था। 
  • साल 2008 में सचिन तेंदुलकर को पद्म विभूषण से भी सम्मानित किया जा चुका है। 
  • साल 1994 में भारत सरकार द्वारा सचिन तेंदुलकर को उनके बेहतरीन प्रदर्शन के लिए अर्जुन पुरस्कार से सम्मानित किया गया है। 
  • इसके बाद साल 1999 में सचिन तेंदुलकर को पद्मश्री पुरस्कार से भी सम्मानित किया गया था, जो की भारत का चौथा सर्वोच्च नागरिक पुरस्कार है।
  • साल 2001 में सचिन तेंदुलकर को महाराष्ट्र सरकार द्वारा ‘ महाराष्ट्र भूषण पुरस्कार ‘ से सम्मानित किया गया था। 

इसके अतिरिक्त सचिन को क्रिकेट जगत में महत्वपूर्ण योगदान के लिए और भी अन्य तरह के बहुत से पुरस्कार दिए गये है। चूँकि सचिन की प्रतिभा और सफलता का स्तर हम उनके अवार्ड्स और सम्मान से बिलकुल भी नही लगा सकते है, इसलिए उनके क्रिकेट के भगवान का दर्जा प्राप्त है।

निष्कर्ष:

मास्टर ब्लास्टर सचिन तेंदुलकर जो आज भारत के साथ ही विश्वभर के क्रिकेट प्रेमियों के दिलो पर राज करते है, हम जिन्हें क्रिकेट के भगवान् के रूप में जानते है। वह सचिन तेंदुलकर आज भारत के लिए भविष्य में क्रिकेट खेलने वाले युवाओ के लिए बेहतरीन आदर्श है।

हमे सचिन तेंदुलकर की सफलता से यह सीख लेना चाहिए।  की भले ही किसी व्यक्ति के पास शुरुआत में संसाधनों की कमी है  लेकिन यदि व्यक्ति जीवन में सफलता प्राप्त करना चाहता है, तब उसे उन्ही सीमित संसाधनों के साथ ही जीवन में आगे बढ़ना चाहिए। हमें आशा है की आपको Sachin Tendulkar Biography In Hindi तथा सचिन तेंदुलकर का जीवन परिचय पर यह आर्टिकल अवश्य ही पसंद आया है।

 

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