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मदर टेरेसा

Mother Teresa Quotes in Hindi | मदर टेरेसा के अनमोल विचार, एवं जीवन कहानी

Mother Teresa Quotes in Hindi

जिंदगी उसी की जिसके मौत पर पूरी दुनिया अफसोस करे। यूं तो हर शख्स आता है दुनिया में मरने के लिए ही।

जी हां मैं यहां एक ऐसे ही शख्स की बात कर रहा हूं जिन्होंने अपनी पूरी जिंदगी दूसरों के लिए जीए है और वह महान इंसान और कोई नहीं बल्कि मदर टेरेसा है। मदर टेरेसा अपनी पूरी जिंदगी एक साधु संत की तरह बिताई हैं। वैसे तो वह भारत देश की नहीं थी मगर भारत के लोगों के लिए कुछ ऐसा करके गई है की हम भारतीय उन्हें कभी नहीं भूल सकते हैं। वे सिर्फ भारत में ही नहीं बल्कि विश्व के कई देशों में ग़रीबों और अनाथों के लिए बहुत से संगठन चालू किए हैं। पूरे विश्व में इसी नाम से वे जाने जाते हैं क्योंकि जिनका कोई नहीं था उस समय मदर टेरेसा उनके साथ थी। अगर आज तक किसी व्यक्तित्व ऐसा सामने आया है कि जिसे कई सारे देशों का उच्चतम नागरिक पुरस्कार दिया गया है तो वे सिर्फ और सिर्फ मदर टेरेसा है। उनकी महानता के कारण उन्हें पूरे विश्व में तो पूजे जाते है साथी ही, अमेरिका, ऑस्ट्रेलिया, कोरिया, और कई सारे देशों का सर्वोत्तम सम्मानित पुरस्कार भी दिया गया है। वे कहते हैं कि – 

“मैं अकेले पूरे विश्व को तो नहीं बदल सकती। मगर एक पत्थर ऐसा जरूर फेंक सकती हूं जिससे की लहरें उठे और वह लहरें पूरी दुनिया को बदल देंगी।” 

तो चलिए अब हम इस अद्भुत व्यक्तित्व वाले महान इंसान की पूरी जिंदगी को जानते हैं (Mother Teresa bio) और उनकी जीवनी से कुछ सीखने का प्रयास करते हैं। (About Mother Teresa)

Mother Teresa Biography in Hindi | मदर टेरेसा की जीवनी 

मदर टेरेसा का नाम Anjezë Gonxhe Bojaxhiu है। मगर वे पूरे विश्व में वे मदर टेरेसा के नाम से ही जाने जाते हैं। उनका जन्म 26 जनवरी 1910 को Albania में हुआ। उनका पूरा परिवार बहुत ही धार्मिक था जिसके कारण मदर टेरेसा भी बहुत ही धार्मिक रहीं। वे बहुत ही दयालु और शांत स्वभाव के थे बचपन में तो वे किसी से ज्यादा बात भी नहीं करते थे। उनके पिता का नाम Nikola Bojaxhiu और उनके माता का नाम Dranafile Bojaxhiu है। वे अपने परिवार के सबसे छोटी थी। उनका परिवार बहुत ही सामान्य परिवार था जहां उनके पिताजी ठेकेदार का काम करते थे। मदर टेरेसा बताते हैं कि उनके माताजी बहुत ही कठोर परिश्रमी थी। जब टेरेसा का आयु मात्रा 9 वर्ष का होता है तभी उनके पिताजी का देहांत हो जाता है। उनका पूरा परिवार बहुत ही दयनीय स्थिति में आ जाता है। उनके माताजी कपड़ा सिलाई के काम में लग जाते हैं उनके परिवार का भरण पोषण करने के लिए। उनके स्कूल और कॉलेज के दिनों में मदर टेरेसा सबसे खूबसूरत दिखती थी। उनके माताजी भी बहुत दयालु थे उनके परिवार का हालत जानते हुए भी जब कोई भी उनसे कुछ तरह की कुछ भी मदद मांगता था तो वे बेझिझक करते। गरीबों और बड़े बुजुर्गों का उनका पूरा परिवार बहुत ही सम्मान करता था। 

जब वह सिर्फ 18 वर्ष के थे और अपने स्कूल, कॉलेज की पढ़ाई पूरी की तभी उन्होंने सोच लिया की उन्हें दूसरों की मदद करनी है। उनके मन में यह विचार उनके परिवार के रीति-रिवाजों से आई। जैसे कि हम पहले भी देख चुके हैं उनका पूरा परिवार बहुत ही सहयोगसील है। बहुत ही कम उम्र में ही उन्होंने साधु संत की तरह जीवन व्यतीत करने आर ज़रूरतमंदों को सहायता करने का ठान लिए। जब उन्होंने यह निर्णय लिया तो उनके माता जी तो पहले बहुत ही निराश थी, क्योंकि उनके माताजी यह जानते थे की मदर टेरेसा अगर साधु संत की तरह जिंदगी बिताएं तो वे कभी और उनसे मिले भी या ना। मगर बाद में उनके निर्णय को मन्ना पड़ा। वे अपना शहर छोड़ दिया और Sister of loreto नामक संस्था के साथ जुड़ गए जो कि एक सेवक संस्था था और साधु संत जैसी जीवनी कैसे व्यतीत करनी है यह सिखाया जाता था। दिसंबर 1928 में वे अपने संस्था द्वारा भारत आते हैं और स्कूल में शिक्षक का काम करने लगता है। बाद में वे फिर कोलकाता और दार्जिलिंग मैं शिक्षक के रूप में तैनात होते हैं और आखिरकार कोलकाता में बस जाते हैं। वह यह दौर था जब दूसरा विश्वयुद्ध चल रहा था। एक बार तो वे हिंदू मुस्लिम की लड़ाई में सड़कों और नालियों में लासे देखी और उन्हें बहुत दया आती है। वे ग़रीब, लाचार इंसानों के लिए कुछ करना चाहते हैं। फिर वे एक आश्रम खोलें जो कि गरीबों को दो वक्त की रोटी प्रदान करती थी। वे एक के बाद एक नए-नए संस्था लाते गया और जगह-जगह आश्रम खोलते गए। वह उनके संस्था द्वारा बहुत से गरीब, विभिन्न रोगों से पीड़ित, अनाथ बच्चों और बेसहारे वयस्क नागरिकों की भरण पोषण और सेवा करते थे। धीरे धीरे वे इस काम को सफल बनाने के लिए और ज्यादा से ज्यादा जरूरतमंदों को फायदा पहुंचाने के लिए कोलकाता, दिल्ली, मुंबई, हैदराबाद इत्यादि कई सारे जगहों पर आश्रम खोलने शुरू कर दी। उनका यह नेक काम देख कर भारतीय और विदेशों से भी उन्हें उनका संस्था चलाने के लिए पैसा दिया जाता था। वे यहां भी नहीं रुके, वे अलग-अलग देशों का भ्रमण करते थे। ऐसे ही उन्होंने अमेरिका, ऑस्ट्रेलिया, लंदन और कई सारे देशों में जहां-जहां गरीब लाचार इंसानों को मदद करने वाली कोई संस्था नहीं थी वहां अपना आश्रम खोला। पूरी दुनिया के लोगों द्वारा उनके इस महान काम को सलाम किया गया और भारत, अमेरिका, ऑस्ट्रेलिया, यूरोप और भी बहुत सारे देशों का सबसे सम्मानित पुरस्कार दिया गया। आखिरकार 5 सितंबर 1997 को दिल का दौरा पड़ने के कारण कोलकाता में उनकी मृत्यु हुई।

Mother Teresa Quotes in Hindi | मदर टेरेसा की उद्धरण

मदर टेरेसा के कुछ बहुमूल्य बातें (Mother Teresa quotes)

“जो आपने कई वर्षों में बनाया है वह रात भर में नष्ट हो सकता है तो भी क्या आगे बढिए उसे बनाते रहिये।”

“लोग अवास्तविक, विसंगत और आत्मा केन्द्रित होते हैं फिर भी उन्हें प्यार दीजिये।”

“मुझे लगता है हम लोगो का दुखी होना अच्छा है, मेरे लिए यह यीशु के चुम्बन की तरह है।”

“ज्यादा बच्चे” कैसे हो सकते हैं ? यह तो बहुत सारे फूलों की तरह हैं।

“सबसे बड़ी बीमारी कुष्ठ रोग या तपेदिक नहीं है , बल्कि अवांछित होना ही सबसे बड़ी बीमारी है।”

“जिस व्यक्ति को कोई चाहने वाला न हो, कोई ख्याल रखने वाला न हो, जिसे हर कोई भूल चुका हो,मेरे विचार से वह किसी ऐसे व्यक्ति की तुलना में जिसके पास कुछ खाने को न हो,कहीं बड़ी भूख, कही बड़ी गरीबी से ग्रस्त है।”

“अगर आप यह देखेंगे की लोग कैसे हैं तो आप के पास उन्हें प्रेम करने का समय नहीं मिलेगा।”

“शांति की शुरुआत मुस्कराहट से होती है।”

“जहाँ जाइये प्यार फैलाइए। जो भी आपके पास आये वह और खुश होकर लौटे।”

“प्रेम की शुरुआत निकट लोगो और संबंधो की देखभाल और दायित्व से होती है, वो निकट सम्बन्ध जो आपके घर में हैं।”

“पेड़, फूल और पौधे शांति में विकसित होते हैं, सितारे, सूर्य और चंद्रमा शांति से गतिमान रहते हैं, शांति हमें नयी संभावनाएं देती है।”

निष्कर्ष 

हमें मदर टेरेसा के जीवनी से यह सीख मिलती है कि अगर इंसान कुछ ठान ले तो उसके लिए कुछ असंभव नहीं है, बस चलते रहना चाहिए। मदर टेरेसा जो कि आज पूरे विश्व का महिला छवि के रूप में व्यक्त होती है वे भी एक साधारण सा परिवार से जन्म लिए और अपनी योग्यता, दया और इंसान के प्रति प्यार से हर एक इंसान को इंसानियत सिखा गए। ऐसा नहीं है कि उनके जीवन में कठिनाई नहीं आई। जब वे भारत में एक के बाद एक आश्रम खोल रहे थे और गरीबों, लाचारो की मदद कर रहे थे तब उन्हें भारत के बहुत से लोगों द्वारा यह कहा गया कि वे क्रिश्चियन धर्म का प्रचार कर रहे हैं। मगर मदर टेरेसा अपना काम करते रहे। वे उनका संस्था चलाने के लिए जगह-जगह से पैसा जुगाड़ करते थे और आखिरकार वे अपने काम में सफल होते हैं। 

आशा करता हूं कि मदर टेरेसा की यह जीवन काहिनी आपको प्रेरित की होगी। हमारे साथ अंत तक बने रहने के लिए आपका बहुत-बहुत धन्यवाद।

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